ढाई दशक के बाद राज्य में फिर खुला बसपा का खाता

एन.महेश बसपा के प्रत्याशी के रूप में यहां से वर्ष 2004 से चुनाव लड़ रहे हैं

By: Ram Naresh Gautam

Published: 16 May 2018, 06:27 PM IST

बेंगलूरु. राज्य में करीब ढाई दशक बाद बहुजन समाज पार्टी का खाता फिर से खुला है। बसपा ने चामराजनगर जिले में एक सीट जीती है। बसपा उम्मीदवार एन महेश कोलेगल्ल से जीते हैं। एन.महेश बसपा के प्रत्याशी के रूप में यहां से वर्ष 2004 से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार महेश 19 हजार 454 मतों से जीते। बसपा ने इस बार चुनाव से पहले ही जद ध के साथ गठबंधन किया था और उसे 20 सीटें समझौते के तहत मिली थी। बसपा को इस बार चुनाव में 0.3 फीसदी यानी 1,08,592 मत मिले।

बसपा प्रमुख मायावती ने जद (ध) के साथ गठबंधन कर वोक्कालिगा और दलित मतदाताओं को गठजोड़ बनाने की कोशिश की थी। इसमें जद (ध) को तो बड़ी सफलता मिली, लेकिन बसपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। पार्टी का मत प्रतिशत मात्र 0.3 प्रतिशत यानी 108,592 वोट रहा। इसमें 71,792 वोट अकेले महेश को आया जो कोल्लेगल से विजयी रहे। वहीं बसपा को वर्ष-2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 2,84,768 वोट मिले थे।

निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी बसपा ने कई उम्मीदवारों के राह में कांटे बिछाने का काम किया। नौ विधानसभा सीटों पर जहां जीत का अंतर 2000 वोटों से तय हुआ है वहां बसपा उम्मीदवारों को भी 2000 के आसपास वोट मिले हैं। वहीं पार्टी निराशाजनक प्रदर्शन पर समर्थकों का कहना है कि बसपा को जो 17 सीटें दी गईं उनमें से 11 सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आती हैं और नि:संदेह यह पार्टी की संभावनाओं को चोट पहुंचाती है क्योंकि बसपा को दलितों का बड़ा समर्थन हासिल है।

बसपा ने वर्ष 2004 में राज्य की राजनीति में कदम रखा था। उस वर्ष के विधानसभा चुनाव में पार्टी 102 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे 1.74 फीसदी वोट मिले थे। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने राज्य की 9 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उसे 1.22 फीसदी मत मिले थे। इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 217 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उसे 2.7 फीसदी वोट मिले थे लेकिन पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई। हालांकि,वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा का मत हिस्सेदारी घटकर 1.66 फीसदी ही रह गया।

हालांकि, वर्ष 1994 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने एक सीट जीती थी। उस वक्त उत्तर कर्नाटक के बीदर सीट से सैयद जुल्फीकार हाशमी ने बसपा उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी लेकिन बाद में उन्होंने बसपा छोड़ दी। तब से बसपा का किसी चुनाव में खाता नहीं खुल पाया था।

Ram Naresh Gautam
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