हवाई यात्रियों को अब नहीं रास आ रहा मेंगलूरु से सफर

हवाई यात्रियों को अब नहीं रास आ रहा मेंगलूरु से सफर
Mangalore International Airport

Priya Darshan | Publish: Oct, 09 2019 07:19:33 PM (IST) | Updated: Oct, 09 2019 07:19:34 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

Air passengers increased in the country but decreased in Mangalore

Mengaluru मेंगलूरु के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा Kannur कन्नूर हवाई अड्डा
राज्य के दूसरे सबसे बड़े हवाई अड्डे के लिए नई मुसीबत

मेंगलूरु. पड़ोसी राज्य केरल में एक वर्ष पूर्व शुरू हुआ कन्नूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (केआइए) अब मेंगलूरु के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। न सिर्फ पड़ोसी राज्य केरल के यात्रियों की मेंगलूरु से उड़ान भरने में रुचि कमी है बल्कि राज्य के मडिकेरी और अन्य सीमावर्ती जिलों के यात्री भी अब मेंगलूरु की जगह कन्नूर को पसंद कर रहे हैं। यहां तक कि मेंगलूरु से भी खाड़ी देशों में जाने वाले मुसाफिरों की बड़ी संख्या अब कन्नूर के रास्ते आ जा रहे हैं।

दरअसल, कन्नूर हवाई अड्डा से खाड़ी देशों के लिए बड़ी संख्या में उड़ान हैं। साथ ही मेंगलूरु की तुलना में केआइए से उड़ान भरने वाले विमानों का किराया 10 हजार रुपए तक कम है। इसके अतिरिक्त विमानों का उड़ान समय भी इस प्रकार का है जा यात्रियों को खाड़ी देशों में पहुंचने पर ज्यादा लाभप्रद साबित होता है। इन सब कारणों से मात्र एक वर्ष में ही कन्नूर हवाई अड्डा बड़ी तेजी से मेंगलूरु हवाई अड्डा के लिए चुनौती बन गया है।
मेंगलूरु से हवाई यात्रियों की संख्या में आई कमी का सीधा असर हवाई अड्डा के विमान सेवाओं पर पड़ा है। नई कपंनियां भी अब मेंगलूरु की जगह कन्नूर को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे मेंगलूरु पर दोहरी मार पड़ रही है। मेंगलूरु का विमानन उद्योग और इस पर आधारित अन्य सेवाओं पर ब्रेक सा लग गया है।

वर्ष 2017-18 में मेंगलूरु से 22 लाख 69 हजार 949 यात्रियों ने सफर किया था। वहीं वर्ष 2018-19 में यात्री संख्या घटकर 22 लाख 40 हजार 664 रही जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.3 प्रतिशत कम थी। यात्री संख्या में हुई कमी का मूल कारण कन्नूर से हवाई सेवाओं का शुरू होना माना जा रहा है। वर्ष 2012-13 के बाद यह पहला मौका रहा जब मेंगलूरु से वार्षिक यात्री संख्या में गिरावट आई है।

कन्नूर से लगता है आधा किराया
केरल और तटीय कर्नाटक से बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में जाने वाले मुसाफिर सफर करते हैं। हवाई यात्रियों का कहना है कि जहां मेंगलूरु से कुवैत का किराया 120 दिनार लगता है, वहीं कन्नूर से इसी गंतव्य के लिए मात्र 60 दिनार देना पड़ता है। किराए का यह अंतर यात्रियों को मेंगलूरु की जगह कन्नूर से सफर करने के लिए आकर्षित कर रहा है।

सांसद को ज्ञापन देने पर भी सुधार नहीं
खाड़ी देशों के मुसाफिरों के एक समूह ने दक्षिण कन्नड़ सांसद नलिन कुमार कटील को दो बार ज्ञापन सौंपकर मेंगलूरु से विमानों का परिचालन समय यात्रियों के अनुकूल करने और प्रतिस्पर्धात्मक किराया लागू कराने की मांग की। हालांकि सांसद को ज्ञापन देने पर भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया और अब यात्रियों ने मेंगलूरु से मुंह फेरना शुरू कर दिया है।

देश का आठवां बड़ा हवाई अड्डा है कन्नूर
2300 एकड़ और 95 हजार वर्ग मीटर टर्मिनल बिल्डिंग वाला कन्नूर हवाई अड्डा देश का आठवां सबसे बड़ा हवाई अड्डा है। अत्याधुनिक तकनीक एवं सुविधाओं से युक्त इसकी हवाई पट्टी को कोड-ई मानक दिया गया है जिसपर बोइंग बी-377 और एयरबस ए-300 विमान उड़ान भर सकते हैं। वहीं अगले विस्तार में इसे एफ-मानक दिया जाएगा जिसके बाद यह एयरबस ए-380 के लिए उपयोगी होगा। वहीं मेंगलूरु हवाई अड्डा इसकी तुलना में बेहद पीछे है और इसका सीधा असर अब परिचालन सेवाओं पर पड़ रहा है।

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