क्षमता से अधिक कैदी, खचाखच भरे राज्य के कारागार

कैदियों के अनुपात में जेलों की स्थापना नहीं होना बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य में केंद्रीय, जिला, तहसील तथा ओपन श्रेणी के साठ कारागारों में कैदियों की क्षमता 13 हजार 622 है। लगभग सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं। जेल विभाग के अनुसार मौजूदा कैदियों की संख्या 15 हजार 257 तक पहुंच गई है। इनमं पुरुष 14 हजार 616 और महिला कैदी 641 हैं।

By: Sanjay Kulkarni

Updated: 27 Nov 2019, 07:28 PM IST

बेंगलूरु. कैदियों के अनुपात में जेलों की स्थापना नहीं होना बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य में केंद्रीय, जिला, तहसील तथा ओपन श्रेणी के साठ कारागारों में कैदियों की क्षमता 13 हजार 622 है। लगभग सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं। जेल विभाग के अनुसार मौजूदा कैदियों की संख्या 15 हजार 257 तक पहुंच गई है। इनमं पुरुष 14 हजार 616 और महिला कैदी 641 हैं। इनमें अब क्षमता से 1635 अधिक कैदी मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इन जेलों में कर्मचारियों के भी कई पद रिक्त हैं, इससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है।
6 दिसंबर तर विवरण सौंपने का निर्देश
हाल में इन कारागारों का प्रशासन तथा बुनियादी सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार की ओर से राज्य को दिशा-निर्देश जारी हुए हैं, लेकिन इनका शतप्रतिशत पालन नहीं किया जा रहा है। अब गत दिवस इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओक तथा न्यायाधीश प्रदीप सिंह यरुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को जेलों की स्थिति को लेकर समग्र विवरण सौंपने को कहा है।
अदालत के निर्देश की अनदेखी
पहले भी उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी, तब अधूरी जानकारी उपलब्ध किए जाने पर आक्रोशित न्यायाधीशों ने राज्य सरकार के महाअधिवक्ता को फटकार लगाई। अब अदालत ने राज्य सरकार से जेलों की संख्या, कैदी रखने की क्षमता और कैदियों की मौजूदा संख्या, तय मानदंडों की अनुपालना की स्थिति, जेलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल तथा शौचालय समेत विभिन्न बुनियादी सुविधाओं का विवरण मांगा है। मामले की सुनवाई 16 दिसम्बर तक टाली गई है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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