सभी विश्वविद्यालय नि:शुल्क संस्कृत पढ़ाएं

सभी विश्वविद्यालय नि:शुल्क संस्कृत पढ़ाएं

Santosh Kumar Pandey | Updated: 04 Jun 2019, 04:33:35 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

राज्यपाल वजूभाई वाळा ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत की शिक्षा नि:शुल्क दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

राज्यपाल का सुझाव
संस्कृत विवि के नए भवन का उद्घाटन
संस्कृत से समृद्ध हुई भारत की कई भाषाएं
बेंगलूरु. राज्यपाल वजूभाई वाळा ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत की शिक्षा नि:शुल्क दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

वे चामराजपेट स्थित कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। संस्कृत भाषा ने भारतीय संस्कृति व परंपराओं में अनन्य योगदान दिया है। लिहाजा इस भाषा को बचाने के साथ ही इसकी शिक्षा को भी वरीयता दी जानी चाहिए और राज्य सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देव भाषा कहलाने वाली संस्कृत विश्व की अनेक भाषाओं की जननी है। यह भाषा हजारों सालों से सहृदयी लोगों को नाना प्रकार से से आनंद देती जा रही है। लेकिन खेद इस बात का है कि 19 वींं सदी से इस भाषा को लगातार आघात पहुंचता आ रहा है।

संस्कृत को अत्यंत श्रेष्ठ व समृद्ध भाषा बताते हुए वाळा ने कहा कि इस भाषा ने भारत की अनेक भाषाओं को समृद्ध किया है और हरेक नागरिक को यह भाषा सीखनी चाहिए। संस्कृत सीखने के लिए विदेशियों में लगातार रुचि बढ़ रही है। विदेशी भी संस्कृत सीख रहे हैं।

राज्यपाल ने उच्च शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हालांकि शहरी क्षेत्रों में गरीब वर्ग के लोगों को भी उच्च शिक्षा पाने का अवसर मिल रहा है पर ग्रामीण क्षेेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अभी भी एक चुनौती है। शिक्षण संस्थाओं को इस दिशा में ध्यान देने क जरुरत है।

ग्रामीण क्षेत्र की ओर देखें विश्वविद्यालय
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जी.टी. देवेगौड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को ग्रामीण क्षेेत्रों की तरफ उन्मुख होना चाहिए और वहां की शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रभाव डालना चाहिए। सरकार ने अगले साल तक प्रत्येक क्षेत्र में कौशल विकास व डिजीटल केन्द्र खोलने पर विचार किया है। इसी तरह विद्यार्थियों को देश के किसी भी कोन में बैठकर आनलाइन परीक्षा देने की सुविधाएं देने अवसर देने के लिए नया कार्यक्रम लागू किया जाएगा।

इस अवसर पर होंबुजा जैन मठ के डा. देवेन्द्र कीर्ति भट्टारक स्वामी, हुक्केरी हिरेमठ के चन्द्रशेखर शिवाचार्य स्वामी, कर्नाटक संस्कृत विवि की कुलपति प्रो. पद्मा शेखर आदि उपस्थित थे।

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