आपदा राहत के लिए राज्य को आवंटित कोष पर्याप्त नहीं

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कर्नाटक के समान ही भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्यों की तुलना में 14 वें वित्त आयोग की सिफारिश के मुताबिक राज्य आपदा राहत कोष (

By: शंकर शर्मा

Published: 18 Aug 2017, 09:50 PM IST

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कर्नाटक के समान ही भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्यों की तुलना में 14 वें वित्त आयोग की सिफारिश के मुताबिक राज्य आपदा राहत कोष ( एसडीआरएफ) में कम आवंटन किए जाने पर आपत्ति जताई है। केंद्र सरकार नेे एसडीआरएफ के तहत कर्नाटक को सिर्फ १५२७ करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जबकि कर्नाटक के समान ही भौगोलिक क्षेत्र वाले मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों को ज्यादा धन आवंटित किया गया है।


मुख्यमंत्री ने गुरुवार को दिल्ली के नार्थ ब्लाक में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस मसले पर चर्चा की और राज्य सरकार की ओर सूखा राहत नियमों में बदलाव के लिए ज्ञापन भी दिया। मुलाकात के दौरान सिद्धरामय्या ने सिंह को बताया कि 14 वें वित्त आयोग की अवधि में महाराष्ट्र के लिए 8 195 करोड़, गुजरात के लिए 38 94 करोड़, तमिलनाडु के लिए 3751 करोड़, अविभाजित आंध्र प्रदेश के लिए 2430 करोड़ तथा राजस्थान के लिए 2153 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जबकि पिछले 16 सालों में से 13 सालों के दौरान सूखे की मार झेल रहे कर्नाटक को इस कोष से केवल 1527 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती आपदाओं व राज्य द्वारा आपदा प्रबंधन पर अधिक धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद 2015 से लेकर 2020 के दौरान राज्य के लिए कुल आवंटन का मात्र 2.4 फीसदी आवंटित किया गया है।


उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ के तहत आवंटित कोष इतना कम है कि इससे सूखा व बाढ़ राहत कार्य चलाना कठिन है और कम आवंटन के कारण राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लिहाजा, एसडीआर के तहत वार्षिक आवंटन की राशि को बढ़ाया जाना। साथ ही इस आवंटन में भेदबाव को दूर किया जाना चाहिए।

नियमों में बदलाव हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए जो नए नियम बनाए हैं उससे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कोष के तहत राज्य को मिलने वाली सहायता में कमी आएगी और मध्यम स्तर पर सूखा प्रभावित तालुक सहायता पाने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसमें आवश्यक बदलाव किए जाने का आग्रह करती है ताकि राज्य के अधिक से अधिक किसानों को फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा मिल सके।

शंकर शर्मा
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