उडुपी का अमासेबैयलु राज्य का पहला सौर ऊर्जा ग्राम

उडुपी का अमासेबैयलु राज्य का पहला सौर ऊर्जा ग्राम

Shankar Sharma | Updated: 12 Jun 2019, 11:14:36 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

उडुपी जिले के कुंदापुर तालुक के अमासेबैयलु ग्राम के सभी घरों के सौर ऊर्जा कनेक्शन से लैस होने के साथ ही इस ग्राम पंचायत को राज्य की पहली सौर ऊर्जा युक्त ग्राम पंचायत का विशिष्ट दर्जा मिल गया है।

बेंगलूरु. उडुपी जिले के कुंदापुर तालुक के अमासेबैयलु ग्राम के सभी घरों के सौर ऊर्जा कनेक्शन से लैस होने के साथ ही इस ग्राम पंचायत को राज्य की पहली सौर ऊर्जा युक्त ग्राम पंचायत का विशिष्ट दर्जा मिल गया है। यह सौर ग्राम परियोजना अमासेबैयलु चेरिटेबल ट्रस्ट, धर्मस्थला ग्रामीण विकास परियोजना तथा कर्नाटक बैंक लिमिटेड की एक संयुक्त पहल है।

धर्मस्थला मंजुनाथेश्वर मंदिर के धर्माधिकारी वीरेन्द्र हेग्गड़े ने मंगलवार को सौर ग्राम परियोजना का उद्घाटन करने के पश्चात कहा कि उपलब्ध सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से ऊर्जा संकट हल होगा और इससे देश के आर्थिक विकास में तेजी आएगी। सौर ऊर्जा का अधिकतम दोहन किए जाने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने आशा जताई कि गांव के लोग इस ऊर्जा स्रोत का सर्वोत्तम उपयोग करेंगे।


अमासेबैयलु चेरिटेबल ट्रस्ट के एजी कोडग़ी ने कहा कि अमासेबैयलु ग्राम में 1800 मकान हैं। सभी घरों को सौर लेम्पों से प्रकाशित करने पर कुल 2.13 करोड़ रुपए की लागत आई है। मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ. एच. हरीश हांडे ने कहा कि भारत के 25 फीसदी से अधिक लोगों को आज भी बिजली सुलभ नहीं है। अमासेबैयलु सौर ऊर्जा परियोजना के बारे में देश भर में जागरूकता उत्पन्न की जानी चाहिए।

एक विवि से यूजी तो दूसरे से पीजी करना होगा आसान
बेंगलूरु. प्रदेश के किसी एक विश्वविद्यालय से स्नातक (यूजी) की शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थी अगर किसी और विवि से स्नातकोत्तर (यूजी) की पढ़ाई करना चाहते हैं तो उन्हें इंटर यूनिवर्सिटी कोटे के तहत उपलब्ध सीटों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


कर्नाटक राज्य उच्च शिक्षा परिषद (केएसएचइसी) और उच्च शिक्षा विभाग ने इंटर यूनिवर्सिटी कोटा नियम को खत्म करने या फिर कोटे को मौजूदा दो से पांच प्रतिशत से बढ़ाकर १०-१५ प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। दोनों विकल्पों में से एक पर केएसएचइसी जल्द अपनी मुहर लगाएगा।


उच्च शिक्षा मंत्री जीटी देवगौड़ा, उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव अनिल कुमार सहित प्रदेश के १९ विवि के कुलपतियों ने भी इस पर सहमति जताई है।

कुमार ने बताया कि पीजी की डिग्री हासिल करने के इच्छुक ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को मन माफिक विवि में पढऩे का बराबर अवसर मिलना चाहिए। कई विवि में तो इंटर यूनिवर्सिटी कोटा दो से पांच फीसदी तक ही सीमित हैं। बेंगलूरु उत्तर विवि के कुलपति प्रो. टीडी केम्पाराजू के अनुसार इंटर यूनिवर्सिटी कोटे को खत्म नहीं कर इसे १०-१५ फीसदी तक बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार जारी है। कोटा समाप्त कर मेरिट के आधार पर दाखिला देने का अर्थ है बेंगलूरु के कॉलेजों में विद्यार्थियों की भीड़।

इसे ऐसे समझें
मैसूरु विवि से यूजी की डिग्री प्राप्त कर चुका कोई विद्यार्थी अगर बेंगलूरु विवि (बीयू) से पीजी की पढ़ाई करना चाहता है तो बीयू में सीट मिलने की संभावना बेहद कम होती है। क्योंकि ऐसे विद्यार्थियों को इंटर यूनिवर्सिटी कोटे के तहत ही आवेदन करना होता है। अधिकतम दो से पांच प्रतिशत विद्यार्थियों को ही इस कोटे का लाभ मिलता है। क्योंकि पीजी में दाखिले के लिए ज्यादातर विवि खुद के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देते हैं।

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