अधिनियम में संशोधन प्रतिष्ठा का मसला नहीं बने : कुमार

Shankar Sharma

Publish: Nov, 14 2017 09:35:15 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
अधिनियम में संशोधन प्रतिष्ठा का मसला नहीं बने : कुमार

जनता दल (ध) के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार को कर्नाटक निजी

बेंगलूरु. जनता दल (ध) के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार को कर्नाटक निजी मेडिकल प्रतिष्ठान अधिनियम (केपीएमई) में संशोधन को प्रतिष्ठा का मसला नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इस तरह का कदम उठाने से निजी अस्पतालों व क्लिनिकों पर ताले लग जाएंगे।

चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ ने बड़ी संख्या में बेलगावी पहुंचकर सुवर्ण विधानसौधा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। कुमारस्वामी ने संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में पारित विधेेयक की नकल करने की कोशिश कर रही है। वहां यह विधेयक पारित होने के बाद स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर पड़ गई हैं और लोगों को उपचार के लिए तमिलनाडु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश आना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि संशोधन से न केवल चिकित्सक प्रभावित होंगे बल्कि लोगों को भी अच्छा इलाज पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। कुमारस्वामी ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर हड़ताल कर रहे चिकित्सकों से मुलाकात की।

चिकित्सकों की मांगों पर विचार करेगी सरकार
स्वास्थ्य मंत्री के आर रमेश कुमार ने विधानमंडल अधिवेशन शुरू होने से पहले कहा कि चिकित्सकों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन इससे लोग प्रभावित नहीं होने चाहिए।

चिकित्सक इस बात का विरोध कर रहे हैं कि केपीएमई कानून में संशोधन नहीं किया जाए लेकिन यह संयुक्त सदन समिति का निर्णय है जो सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार अगला कदम उठाएगी। सरकार निश्चित तौर पर चिकित्सकों की मांगों पर विचार करेगी।

सीएम के साथ वार्ता विफल, हड़ताल पर अड़े चिकित्सक

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दोपहर करीब १२.३० बजे आईएमए, कर्नाटक के अध्यक्ष डॉ. एचएन रविंद्र को बैठक के लिए बुलावा भेजा। डॉ. रविंद्र की अगुवाई में आईएमए के एक प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री के साथ बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। बैठक के बाद डॉ. रविन्द्र ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति की स्थापना, चिकित्सकों को जेल भेजने और वित्तीय दंड के प्रावधान पर फिर गौर करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने मांगों को सुना। ज्यादातर मांगों से उन्हें कोई खास परेशानी नहीं थी लेकिन मुख्यमंत्री ने आईएमए की मुख्य मांगों में से एक जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति के स्थापना के प्रस्ताव को विधेयक से हटाने पर कुछ नहीं कहा। डॉ. रविन्द्र ने बताया कि चिकित्सकों की हड़ताल जारी रहेगी। आईएमए के सामान्य निकाय बैठक में यह निर्णय लिया गया। वार्ता विफल होने के बाद क्या चिकित्सक मंगलवार से पूर्व घोषित भूख हड़ताल पर जाएंगे सवाल के जवाब में डॉ. रविन्द्र ने कहा कि इस पर मंगलवार को निर्णय लेंगे।


सरकारी योजनाओं को जोडऩा अन्याय
बैठक में शामिल कर्नाटक ऑर्थाेपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नित्यानंद राव ने मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी अस्पतालों पर सरकार की ओर से तय उपचार शुल्क पेशे के लिए नुकसानदेह होगा। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अनुसार ७६ फीसदी लोग उपचार के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। जबकि २४ फीसदी लोग ही सरकारी अस्पतालों में उपचार करा पाते हैं। उपचार शुल्क निर्धारित करने से कई छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे। सरकारी योजनाओं को निजी चिकित्सकीय पेशे से जोडऩा अन्याय होगा।


गरीबों के हित में विधेयक
बैठक के दौरान सिद्धरामय्या ने चिकित्सकों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा, उनका इरादा चिकत्सकों को परेशान करने का नहीं है। सभी चिकित्सक बुरे नहीं होते हैं। गरीबों के हित में विधेयक लाया गया है। इसके लिए चिकित्सकों को हड़ताल करने की जरूरत नहीं है। विधेयक पर चर्चा होनी बाकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधेयक पेश करने से पहले चिकित्सकों की मांगों पर वे गौर करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री रमेश कुमार व अन्य संबंधित अधिकारियों से चर्चा के बाद ही आगे कोई कदम उठाएंगे। सरकार एक तरफा निर्णय नहीं लेगी। चिकित्सकों व अन्य हितधारकों को भी बात रखने का अवसर मिलेगा।

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