प्राणी कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन होगा : मुख्यमंत्री

प्राणी कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन होगा : मुख्यमंत्री

Ram Naresh Gautam | Publish: Aug, 12 2018 05:52:57 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं का संज्ञान लिया

बेंगलूरु. भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एस.पी. गुप्ता ने शुक्रवार को राज्यपाल वजुभाई वाळा व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में बोर्ड की ओर से राष्ट्रीय प्राणी क्रूर यातायात, कत्ल व बलि निरीक्षण समिति के डॉ. श्रीकृष्ण मित्तल, सदस्य गिरीश जे शाह, सुनील मानसिंघका व रामकिशन रघुवंशी मौजूद थे।

बैठक में सड़कों पर घूमते आवारा प्राणियों की समस्या, गोचर भूमि, श्वान और संबंधित जन्म रोक प्रतिबंध शल्य चिकित्सा, कर्नाटक राज्य पशु कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन करने, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार इनका संचालन, राज्य से बाहर जाते ंतराज्यीय क्रूर व अवैधानिक प्राणी यातायात, राज्य में फैले अवैध बूचडख़ाने, पशु वध, जिला प्राणी दया संघ (एसपीसीए) के संचालन आदि कई विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं का संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य प्राणी कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन शीघ्र किया जाएगा।

 

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येलबुर्गा में अस्पताल में 6 दिन से बिजली नहीं
कोप्पल. जिले के येलबुर्गा सरकारी अस्पताल में गत 6 दिनों से बिजली गुल है। उपचार तो बाधित हो ही रही है। शाम ढलते ही मरीजों और परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। अंधेरे में मोमबत्ती, टॉर्च और मोबाइल फोन से काम चलाना पड़ रहा है। मरीजों में गर्भवती महिलाएं भी हैं। जबकि अस्पताल के स्टाफ क्वार्टर में सोलर पैनल से बिजली की आपूर्ति हो रही है।

अस्पताल के अधिकारियों का मानना है कि मरीजों से ज्यादा कर्मचारियों को बिजली की जरूरत है क्योंकि अस्पताल के प्रबंधन और संचालन में उनकी भूमिका अहम होती है। समस्या के आगे क्षेत्रीय विधायक भी खुद को मजबूर और असहाय बताया। विधायक हलप्पा ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई।

समस्या के समाधान के लिए अब वे खुद अधिकारियों से मिलेंगे। स्थानीय निवासी महंतेश ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण अस्पताल में बिजली गुल है। अस्पताल के पास सुचारू रूप से बिजली के लिए अब तक कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। आसपास के कुछ इलाके भी प्रभावित हैं। शिकायत पर भी अधिकारी और कर्मचारी ट्रांसफॉर्मर ठीक करने नहीं पहुंचे।

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