युद्ध में वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा उपग्रह जीसैट-7 ए

युद्ध में वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा उपग्रह जीसैट-7 ए

Rajendra Shekhar Vyas | Updated: 20 Dec 2018, 11:32:41 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

जीएसएलवी ने भरी एक और सफल उड़ान

उपग्रह को सटीकता से कक्षा में पहुंचाया
नेटवर्क केंद्रित युद्ध प्रणाली को मिलेगी मजबूती
बेंगलूरु. वायुसेना की नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली (एनसीडब्ल्यू) को मजबूती प्रदान करने लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को आधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-7 ए का सफल प्रक्षेपण कर उसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया। यह उपग्रह वायुसेना के सभी संसाधनों मसलन, वायुवाहित पूर्व चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली (अवाक्स), विभिन्न जमीनी केंद्रों और रिमोट चालित वायुयानों (ड्रोन) आदि के बीच इंटरफेस का काम करेगा जिससे नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध प्रणाली मजबूत होगी।
इससे पहले इसरो ने नौसेना के लिए जीसैट-7 (रुक्मिणी) उपग्रह लांच किया था। जीसैट-7 ए वायुसेना के लिए समर्पित है लेकिन इसकी क्षमता का 30 फीसदी उपयोग सेना भी करेगी। भारतीय सेना के लिए इसरो जीसैट-7 श्रृंखला के दो अन्य उपग्रह जीसैट-7 बी (सेना के लिए) और जीसैट-7 सी (परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए) भी लांच करेगा। जीसैट-7 ए उपग्रह में अवाक्स को संचालित करने की क्षमता है जिससे वायुसेना के ड्रोन और पायलट रहित विमानों का परिचालन होगा। उपग्रहों के जरिए ड्रोन का परिचालन होने से उनका रेंज काफी बढ़ जाएगा क्योंकि निगरानी एवं नियंत्रण जीसैट-7 ए से होने लगेगा और वह दृश्य सीमा के पार जाकर भी सुरक्षित लौट आएगा।
इसरो की चौथी पीढ़ी के रॉकेट जीएसएलवी एफ-11 ने 2250 किलोग्राम वजनी जीसैट-7 ए के साथ ठीक शाम 4.10 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से उड़ान भरी और 19 मिनट बाद निर्दिष्ट कक्षा में स्थापित कर दिया। कक्षा में पहुंचते ही उपग्रह के सभी चारों सौर पैनल खुल गए और हासन स्थित मुख्य नियंत्रण कक्ष से संपर्क स्थापित हो गया।
जीएसएलवी मार्क-2 की यह 13 वीं और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ 7 वीं उड़ान थी जो उम्मीदों के अनुरुप रही। पूर्व निर्धारित पथ का अनुसरण करते हुए रॉकेट ने जब उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया तो नियंत्रण कक्ष में बैठे वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। उपग्रह के साथ भेजे गए ऑनबोर्ड कैमरे ने उपग्रह के रॉकेट से अलग होने और कक्षा में प्रवेश करने की घटना का जीवंत प्रसारण भी किया। हालांकि, फिर एक बार इस मिशन पर बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में उठे तूफान 'फेठईÓ का खतरा था लेकिन मौसम विभाग ने सटीक भविष्यवाणी कर मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रक्षेपण के समय श्रीहरिकोटा में हवा की गति और मौसम प्रक्षेपण मानंदडों के अनुकूल रहा। इससे पहले 26 घंटे की सुचारू उलटी गिनती के दौरान प्रक्षेपण समय से पांच घंटे पहले तरल ऑक्सीजन और तीन घंटे पहले तरल हाइड्रोजन क्रायोजनिक चरण में भरने की कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया पूरी की गई। क्रायोजेनिक चरण में तरल ऑक्सीजन को माइनस 195 डिग्री और तरल हाइड्रोजन को माइनस 253 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर भंडारित करना होता है।
इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने प्रक्षेपण को शानदार बताते हुए इसरो टीम को इसके लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि हासन स्थित मुख्य नियंत्रण केंद्र से अब उपग्रह को भू-स्थैतिक अंतरण कक्षा (जीटीओ) से भू-स्थैतिक कक्षा में पहुंचाने के लिए ऑपरेशंस गुरुवार से शुरू होंगे। ऑपरेशनल कक्षा में पहुंचने के बाद यह उपग्रह 8 साल से अधिक समय तक देश को सेवाएं देता रहेगा।
35 दिनों में श्रीहरिकोटा से तीन मिशन लांच: शिवन
पिछले 35 दिनों इसरो ने श्रीहरिकोटा से सफलता पूर्वक तीन मिशन लांच किए हैं। जीएसएलवी मार्क-3 डी-2 से जीसैट-29 उपग्रह 14 नवम्बर को लांच किया गया। उसके बाद पीएसएलवी सी-43 से 29 नवम्बर को हायसिस उपग्रह और अब जीएसएलवी एफ-11 ने जीसैट-7 ए को सुपर सिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट में स्थापित किया है।

 

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