श्रद्धा, उत्साह के साथ अष्टपद महातीर्थ की भावयात्रा

श्रद्धा, उत्साह के साथ अष्टपद महातीर्थ की भावयात्रा

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 03 2018 06:07:37 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

आचार्य ने कहा कि अनंत काल से चार गतियों में भटकती हमारी आत्मा को भवसागर से पार उतारने के लिए तीर्थ का सर्वश्रेष्ठ आलंबन है

मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में जैनाचार्य रत्नसेन विजय सूरीश्वर की निश्रा में भक्तामर तप एवं सम्मेत शिखर तप के तपस्वियों द्वारा अष्टपद महातीर्थ की भावयात्रा का संगीतमय कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्य ने कहा कि अनंत काल से चार गतियों में भटकती हमारी आत्मा को भवसागर से पार उतारने के लिए तीर्थ का सर्वश्रेष्ठ आलंबन है। जगत में तीर्थ तो बहुत हैं परंतु बड़ी पंच तीर्थ के रूप में मुख्यतया आबू, अष्टापद, शत्रुंजय, गिरनार, सम्मेत शिखर को महातीर्थ के रूप में याद किया जाता है।

 

हर व्यक्ति की सफलता में परिजनों का योगदान अहम : तारा अनुराधा
बेंगलूरु. हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो उसकी सफलता में उसके परिजनों का योगदान अहम होता है। लिहाजा हमें पारिवारिक रिश्तों की अहमियत तथा संवेदनशीलता को समझना होगा। विधान परिषद की पूर्व सदस्य तारा अनुराधा ने यह बात कही। रविवार को शहर के गांधी भवन के सभागार में लेखिका पल्लवी इडूर की इरेना स्लेंडर की जीवनी पर आधारित कन्नड़ भाषा में अनुदित पुस्तक 'जोलांटाÓ के विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि इरेना स्लेंडर जैसी महिलाओं की यशोगाथा से हम आज भी अनभिज्ञ हैं।

ऐसी अनुकरणीय महिलाओं का जीवन चरित्र समाज के सामने लाने का महान कार्य साहित्यकार कर रहे हैं इसलिए साहित्यकार साधुवाद के पात्र हैं। इरेना स्लेंडर ने अपनी जान जोखिम में डाल कर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर की सेना की नजरों से बचकर नाजी कैंप से 2500 से अधिक यहूदी बच्चों की जान बचाई थी। ऐसी मिसालें विश्व को मानवता का संदेश देती है।

चित्रकला परिषद के अध्यक्ष डॉ. बी.एल. शंकर ने कहा कि पहले की तुलना में अधिक संपन्नता आने के बावजूद समाज में एक दूसरे के प्रति द्वेष की भावना लगातार बढ़ रही है। समाज में अच्छे-बुरे दोनों प्रकार के लोग रहते हैं। यह परंपरा संदियों से चलती आ रही है। ऐसी स्थिति के बीच समाज के प्रति संवेदनशील होकर दूसरों के सुख के लिए अपने सुखों को तिलांजलि देने वाले लोग अब विरले ही होते हैं। ऐसी स्थिति में हमें इतिहास का अध्ययन करते हुए समाज के लिए जीने वाले लोगों से प्रेरणा लेकर समाज का ऋण चुकाने के लिए कुछ ना कुछ योगदान देना होगा। समारोह में डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी, ज्योति ई. तथा पुस्तक की अनुवादक पल्लवी इडूर ने विचार व्यक्त किए।

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