आरटी-पीसीआर रिपोर्ट भी हो सकती है फॉल्स निगेटिव या पॉजिटिव

- समय से पहले या गलत तरीके से जांच बड़े कारण

By: Nikhil Kumar

Published: 03 Aug 2020, 01:14 AM IST

बेंगलूरु. प्रोस्टेट सर्जरी करा चुके 75 वर्षीय मरीज ने बुखार, खांसी व गले में खराश के बाद आरटी-पीसीआर जांच कराई। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई। कुछ दिन बाद सांस लेने में तकलीफ होने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कर चिकित्सकों ने उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। दूसरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

दूसरे मामले में 33 वर्षीय मरीज की जांच में टायफाइड की पुष्टि हुई। दो दिन में कोविड के लक्षण सामने आने पर रैपिड एंटीजन जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आई। फेफड़ों की सीटी स्कैन में कोरोना संक्रमण का शक हुआ। आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। आरटी-पीसीआर के मुकाबले एंटीजन जांच में सेंसिविटी कम होने के कारण इस मामले में कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई।

प्रक्रिया अस्पताल के निदेशक डॉ. के. आर. माधव ने बताया कि इस तरह के मामले अब हैरान नहीं करते हैं लेकिन चिकित्सकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। आरटी-पीसीआर की निगेटिव या पॉजिटिव कोरोना रिपोर्ट भी गलत हो सकती है। विशेष कर उन मामलों में जब जांच जल्दी की गई हो क्योंकि वायरल लोड कम होने की स्थिति में सैंपल में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं होती है। जांच के लिए थ्रोट स्वाब लेने का तरीका गलत हो तब भी रिपोर्ट के फॉल्स पॉजिटिव या फॉल्स निगेटिव होने की संभावना रहती है।

मेंगलूरु में ही सामने आए बुखार के एक और मामले में पीडि़त ने आरटी-पीसीआर जांच कराई। रिपोर्ट पॉलिटिव आई। दूसरे अस्पताल के इसी जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन मरीज डेंगू से पीडि़त निकला।

स्वास्थ्य विभाग भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता में है। इनके अनुसार कम वायरल लोड या जांच के तरीके भी रिपोर्ट प्रभावित करते हैं। आरटी-पीसीआर के 99 फीसदी रिपोर्ट सही आ रहे हैं। कुछ मामलों के कारण जांच प्रणाली पर सवाल उठाना सही नहीं है।

Nikhil Kumar Reporting
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