बचें इन सात सामाजिक पापकर्म से

हर डेटा सूचना नहीं होती, हर सूचना ज्ञान नहीं होता और हर ज्ञान बुद्धिमत्ता नहीं होती।

ज्ञान को बुद्धिमत्ता में बदलने की कवायद कॉलेज से बाहर निकलने के बाद

मणिपाल.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने सात सामाजिक पापकर्म का उल्लेख किया था। काम के बिना धन, विवेक के बिना खुशी, मानवता के बिना विज्ञान, चरित्र के बिना ज्ञान, सिद्धांत के बिना राजनीति, नैतिकता के बिना वाणिज्य और बलिदान के बिना पूजा। इन पापों से बचा जाए तो जीवन बदल सकती है।

ये बातें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मंडे ने कही। वे शनिवार को मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी (एमएएचइ) के तीन दिवसीय दीक्षांत समारोह (Convocation) के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे।

डॉ. मंडे ने कहा कि आजादी के बाद से विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने देश को आकार दिया है। आज देश वैश्वीकरण को अपनाने का प्रयास कर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आदि जैसे शब्दों का प्रयोग पहले से कहीं ज्यादा होने लगा है। हर डेटा सूचना नहीं होती, हर सूचना ज्ञान नहीं होता और हर ज्ञान बुद्धिमत्ता नहीं होती। इसलिए कोर्स के दौरान प्राप्त डेटा और ज्ञान को बुद्धिमत्ता में बदलने की कवायद कॉलेज से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है।

मणिपाल शिक्षा और चिकित्सा समूह के अध्यक्ष डॉ. रंजन पई, एमएएचइ की ट्रस्टी वसंती आर. पई और प्रो-चांसलर डॉ. एच. एस. बल्लाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

Nikhil Kumar
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