बदलाव को स्वीकारने में ही विकास

राजाजीनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 26 Aug 2020, 11:01 PM IST

बेंगलूरु. सलोत जैन आराधना भवन में आचार्य देवेंद्रसागर ने कहा कि हर धर्म अलग-अलग रूपों में एक ही शिक्षा देता है कि प्रभु पर भरोसा रखने से जीवन यात्रा सहज रहती है।

मां की गोद में बैठा छोटा-सा बच्चा भी जरा सा झटका लगने पर अपने हाथ में जो कुछ आए उसे पकड़ लेता है, जैसे उसके सहारे नीचे गिरने से बच जाएगा। हम अपनी बुद्धि के कारण सोचते हैं कि भगवान उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद की खुद चेष्टा करता है। यह एक सीमा तक सच है। पर यही वजह है कि खुद को धार्मिक मानने वाले और हमेशा ईश्वर का नाम जपने वाले भी दैनिक जीवन की चिंताओं मुक्त नहीं हो पाते। जब कोई कठिन स्थिति आती है और लगता है कि अब चीजें हमारे काबू में नहीं हैं, तब हम पूरी तरह उसकी शरण में लौट जाते हैं। और सब कुछ उसके भरोसे छोड़ देते हैं। वह हमें कठिनाइयों से लडऩे की ही नहीं, उनके साथ जीने की ताकत भी देता है।

आचार्य ने श्रद्धालुओं से प्रश्न किया की वह कौन सी चीज है, जो हमारे विश्वास को डांवाडोल करती है? प्रश्न का उत्तर भी स्वयं ही देते हुए कहा कि वह है अनिश्चितता। वह हमें लक्ष्य की ओर बढऩे से पहले ही ठिठका देती है। हम जो कुछ करते हैं, उसका फल पहले से निश्चित कर लेना चाहते हैं जबकि जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं होता। थोड़ी उलझन, थोड़ी अनिश्चितता के बिना हम कुछ सीखने और आगे बढऩे में समर्थ नहीं हो सकते। हम बदलाव से डरते हैं, पर उसे स्वीकारने में ही विकास है।

आस्था हमें परिवर्तन के डर से बचा कर आगे बढऩे में मदद करती है। विश्वास संघर्ष की स्थिति में हमें ताकत देता है। उसके सदा साथ होने का अहसास हमें खतरों का सामना करने की हिम्मत देता है।

Santosh kumar Pandey Desk
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