कांग्रेस नेताओं के परिचितों के ठिकानों से मिली नोटों की गड्डियां

कांग्रेस नेताओं के परिचितों के ठिकानों से मिली नोटों की गड्डियां
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Ram Naresh Gautam | Updated: 12 Oct 2019, 12:41:20 AM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • आयकर विभाग (Incom Tax Department) के छापे में हुआ क्र100 करोड़ की अघोषित संपत्ति का खुलासा

बेंगलूरु. आयकर विभाग ने राज्य के कुछ निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में सीटों को ब्लॉक करने और बाद में उसे संस्थानिक कोटा में तब्दील कर अधिक डोनेशन पर कम मेधावी विद्यार्थियों को देने के खेल का खुलासा किया है।

दो दिनों से तीन निजी चिकित्सा महाविद्यालय का संचालन करने वाले शैक्षणिक ट्रस्टों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर आयकर छापेमारी कर रहा है। गुरुवार को शुरू हुई छापेमारी शुक्रवार को भी जारी रही।

विभाग की छापेमारी के दौरान करीब 100 करोड़ रुपए की अघोषित आय का खुलासा हुआ है। इस दौरान विभाग ने 8.82 करोड़ रुपए की अघोषित संपदा जब्त की है जिसमें 4.60 करोड़ रुपए के फिक्सड डिपॉजिट और 4.22 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नकद राशि शामिल है।


मेडिकल सीटों को ब्लॉक कर अधिक डोनेशन पर दी
विभाग के सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान परामर्श के जरिए मेधावी विद्यार्थियों को आवंटित की जाने वाली सीटों को ड्रॉप आउट के जरिए संस्थानिक कोटे में तब्दील करने के खेल का खुलासा हुआ।

छापे के दौरान मिलने दस्तावेजों से एमबीबीएस और पीजी की सीटों के रुपांतरण, दलालों को कमीशन के भुगतान और नकद राशि के बदले सीट देने का पता चला। सूत्रों के मुताबिक ट्रस्टों के जरिए कई शिक्षण संस्थानों ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के नाम पर मेडिकल की सीटें ब्लॉक कर बाद में उसे दूसरे कोटे में बदल कर अधिक शुल्क पर कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को दे दी।

इस मामले की शिकायत मिलने के बाद ही विभाग ने दो प्रमुख नेताओं से जुड़े शिक्षण संस्थानों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की। विभाग ने कार्रवाई के दौरान अभी तक 4.22 करोड़ रुपए नकद जब्त किए हैं।

एक शिक्षण संस्थान के ट्रस्टी के ठिकानों से 89 लाख रुपए नकद जब्त किए गए जिसमें से बेंगलूरु के एक ठिकाने से ही करीब 70 लाख रुपए नकद जब्त किए गए।

विभाग ने कार्रवाई के दौरान आठ कर्मचारियों के नाम पर किए गए 4.60 करोड़ रुपए के फिक्स डिपॉजिट भी जब्त किए हैं। जिन विद्यार्थियों के नाम का इस्तेमाल सीटों के रुपांतरण के लिए किया गया उनके बयानों से इस खेल के तरीके का खुलासा हुआ।

कांग्रेस नेताओं के परिचितों के ठिकानों से मिली नोटों की गड्डियां

कर्मचारियों और उनके परिजनों के नाम खुलवाए बैंक खाते
सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान पता चला कि डोनेशन के नाम पर ली जाने वाली राशि को जमा कराने के लिए कर्मचारियों और उनके परिजनों के नाम पर कई खाते खुलवाए गए थे।

उन खातों में नकदी जमा करोन के बाद उसे सावधि जमा (फिक्सड डिपॉजिट) में बदल दिया जाता था। इसी डिपॉजिट के आधार पर ट्रस्टी सर्विस लोन ले लेते थे।

जांच के दौरान पता चला कि सावधि जमा से मिलने वाली ब्याज की राशि का उपयोग ट्रस्टी निजी हैसियत से लिए गए सर्विस लोन का चुकाने के लिए किया जाता था। जांच के दौरान अचल संपत्तियों में भी अघोषित निवेश का पता चला।

पांच दर्जन विद्यार्थी राजस्थान के
सूत्रों का कहना है कि जिन विद्यार्थियों के नामों पर सीटों का रुपांतरण किया गया उनमें से करीब पांच दर्जन राजस्थान के हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान 185 मेडिकल सीटों को इस तरह दूसरे कोटे में बदल कर अधिक डोनेशन (कैपिशटेशन फीस) पर कम मेधावी विद्यार्थियों को देने का मामला सामने आया है।

सूत्रों का कहना है कि इन सीटों के लिए औसतन 50-65 लाख रुपए लिए गए। सूत्रों का कहना है कि अभी तक करीब 100 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता चला है और मामले की जांच चल रही है।


दो कांग्रेस नेताओं से जुड़े ठिकानों पर छापे
गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ जी. परमेश्वर और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर एल जालप्पा के ठिकानों पर विभाग ने गुरुवार को छापेमारी की कार्रवाई शुरू की थी।

विभाग के 100 अधिकारियों की टीम बेंगलूरु के साथ ही कोलार, तुमकूरु, चिकबल्लापुर, बेंगलूरु ग्रामीण व अन्य जगहों पर स्थित 30 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

विभाग के सूत्रों के मुताबिक छापेमारी करवंचना और शिक्षण संस्थानों से होने वाली आमदनी का खुलासा नहीं करने से जुड़े मामले में की जा रही है। दोनों नेता परिवार और मित्रों के साथ ट्रस्टों के जरिए कई शिक्षण संस्थानों का संचालन करते हैं।

सूत्रों ने बताया कि छापे के दौरान बरामद दस्तावेजों और आयकर रिटर्न व 2018 के विधानसभा चुनाव में दायर शपथ में दी गई जानकारी को लेकर अधिकारियों के दल ने परमेश्वर से पूछताछ भी की।

विभाग के सूत्रों का कहना है कि नीट के जरिए मेडिकल कॉलेजों में सीटों को ब्लॉक करने से जुड़ी अनियमितता की शिकायत मिलने को लेकर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान बरामद दस्तावेजों की जांच चल रही है।

गौरतलब है कि परमेश्वर कांग्रेस और जद-एस गठबंधन सरकार में करीब 14 महीने तक उपमुख्यमंत्री रहने के साथ ही छह साल तक प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। जालप्पा 1996-1998 के बीच केंद्रीय कपड़ा मंत्री रह चुके हैं।

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