राज्य के संतुलित औद्योगिक विकास का लक्ष्य : शेट्टर

पांच लाख करोड़ का निवेश, 20 लाख रोजगारों का सर्जन

By: Sanjay Kulkarni

Published: 20 Jan 2021, 06:25 AM IST

बेंगलूरु. अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश 20 लाख रोजगारों का सर्जन, राज्य के दूसरे तथा तीसरे श्रेणी के शहरों का औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन वर्ष 2020-25 के लिए पंचवार्षिक औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा।बृहद उद्यम मंत्री जगदीश शेट्टर ने यह बात कही।

औद्योगिक नीति को लेकर पुस्तिका जारी करते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति में पहली बार औद्योगिक क्षेत्र के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधनों के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में ही प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना को शामिल किया गया है। इससे औद्योगिक इकाइयों को कुशल मानव संसाधन मिलने के साथ-साथ सैकड़ों रोजगार पैदा होंगे।

इसी नीति के तहत औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति के तहत स्थानीय लोगों को 70 फीसदी रोजगार सुनिश्चित किए जा रहे हैं। जिस कारण अब राज्य के विभिन्न जिलों के युवाओं को रोजगार की तलाशी के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

राज्य के 31 जिलों में हर जिले के लिए एक विशेष उत्पाद तय किया गया है। ऐसे उत्पादों के प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने से ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य में उद्यम के विकास के लिए अनुकूल माहौल होने से कर्नाटक में देश-विदेश के उद्यमी निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। राज्य में वर्ष 2025 तक 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश संभव है।राज्य में औद्योगिक विकास का संतुलन हो इस लिए राज्य को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

जो जिले औद्योगिक विकास में अभी तक पिछड़े है ऐसे जिलों को जोन वन तथा जोन टू में शामिल किए गए है। यहां निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यमियों को कई रियायतें दी जा रही हैं। कल्याण कर्नाटक के बीदर, कलबुर्गी, यादगिरी, कोप्पल जैसे जिलों के साथ-साथ शिवमोग्गा हुब्बली-धारवाड में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि इसी योजना के अंतर्गत हाल में कोप्पल जिले में 450 एकड़ क्षेत्र में खिलौने बनानेवाली इकाइयां स्थापित करने की योजना का शिलान्यास किया गया है। वर्ष 2020 में राज्य में 1 लाख 54 हजार 937 करोड़ रुपए निवेश के 95 प्रस्ताव सामने आए हैं। गत वर्ष 58 हजार करोड़ रुपए का विदेशी निवेश हासिल कर कर्नाटक अब औद्योगिक विकास क्षेत्र में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

इस क्षेत्र में भी सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जाति जनजाति के उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए आसानी से भूमि उपलब्ध हो इसलिए कर्नाटक भूसुधार कानून 1964 की धारा 109 तथा 79 ए तथा 79 बी को निरस्त करने का फैसला किया है। यह फैसला किसान तथा उद्यमी दोनों के लिए लाभदायक होगा।

केंद्र सरकार की विभिन्न औद्योगिक गालियारा योजना के अंतर्गत कई औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हो रही है।इस अवसर पर उद्यम एवं वाणिज्य विभाग के अपर मुख्य सचिव गौरव गुप्ता, औद्योगिक विकास विभाग के आयुक्त गुंजन कृष्णा, कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवशंकर उपस्थित थे।

Sanjay Kulkarni Reporting
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