साइबर थानों में पर्याप्त प्रशिक्षित अमला नहीं

धीमी गति से होती है जांच- दंडित नहीं हो पाते अपराधी

By: Sanjay Kulkarni

Published: 16 Sep 2020, 05:05 PM IST

बेंगलूरु. राज्य में साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही लेकिन इसके शिकार लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है। शिकायतकर्ता काफी उम्मीद के साथ साइबर थानों में शिकायत दर्ज कराते हैं लेकिन प्रशिक्षित अमला पर्याप्त संख्या में नहीं होने के कारण जांच बेहद धीमी गति से होती है। हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं केवल गिने चुने मामलों में ही दोषियों का सजा मिल पा रही है।

राज्य के सभी जिलों में साइबर थाने हैं लेकिन साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने में विफल हंै। इसका प्रमुख कारण प्रशिक्षित अमले का नहीं होना है। ऐसे थानों में वाहन और कार्यालय जैसी कोई अलग बुनियादी सुविधा भी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर अपराधों की संख्या प्रति वर्ष दस हजार तक पहुंच रही है। लेकिन जांच पूरी होने के बाद सुलझने वाले मामलों की 200 से भी कम है।

वर्ष 2017 में 3 हजार 148 मामले दर्ज हुए इनमें से 1036 मामले सुलझ गए है। वर्ष 2018 में दर्ज 5 हजार 788 मामलों में से 386 मामले सुलझ गए तो वर्ष 2019 में दर्ज 12 हजार में से 193 मामले ही सुलझे हंै। ऑनलाइन लेन-देन में धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक प्रवीण सूद के अनुसार साइबर तथा मादक पदार्थों के अपराधों की जांच करने वाले पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लिहाजा आनेवाले दिनों में साइबर तथा मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच करने वाले सभी प्रकोष्ठों में प्रशिक्षित अमला उपलब्ध होगा।साइबर अपराध नियंत्रित करने के लिए असीमित सिम का कार्ड की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए।

आधार पहचान पत्र के साथ सिम कार्ड को लिंक कर एक व्यक्ति को दो से अधिक सिम कार्ड नहीं मिलने चाहिए। अधिकतर साइबर अपराध सिम कार्ड तथा स्मार्टफोन के जरिए होते हैं। ऐसे मामलों में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर सिम खरीद कर अपराध किए जाते है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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