डेढ़ किलोमीटर दूर से दुश्‍मन के चीथड़े उड़ा देगी यह देसी स्‍नाइपर राइफल

डेढ़ किलोमीटर दूर से दुश्‍मन के चीथड़े उड़ा देगी यह देसी स्‍नाइपर राइफल
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

Sanjay Kumar Kareer | Updated: 14 Sep 2019, 07:49:19 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

कंपनी का दावा है कि भारत में पहली बार उन्होंने स्वदेशी तकनीक से स्नाइपर राइफल का मॉडल तैयार कर उसे बनाया है। स्वदेशी तकनीक से स्नाइपर राइफलें बना कर सेना की इस समस्‍या के समाधान का मार्ग प्रशस्‍त कर दिया है।

बेंगलूरु. पाकिस्‍तान के साथ लगती सीमा पर अक्‍सर भारतीय सैनिकों पर पड़ोसी मुल्‍क के स्‍नाइपर्स हमले करते रहते हैं, जिसमें भारतीय सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। भारतीय सेना पाकिस्‍तान के हमलों का पूरी दिलेरी के साथ सामना करते हुए माकूल जवाब देती रहती है। अब सेना को ऐसी राइफलें मिल सकती हैं, जिसकी मदद से वह डेढ़ किलोमीटर दूर से दुश्‍मन के चीथड़े उड़ा सकेगी।

पिछले काफी समय से सेना स्‍नाइपर राइफलों की खरीद करना चाह रही है, लेकिन अभी तक सेना को ये राइफलें उपलब्‍ध नहीं हो पाईं हैं। अब एक भारतीय कंपनी ने स्वदेशी तकनीक से दो स्नाइपर राइफलें बना कर सेना की इस समस्‍या का समाधान करने का मार्ग प्रशस्‍त कर दिया है।

बेंगलूरु से करीब 28 किलोमीटर दूर जिगणी में एसएसएस डिफेंस नाम की कंपनी ने दो स्‍नाइपर राइफलों का प्रोटॉटाइप तैयार कर लिया है। इन राइफलों के नाम वाइपर और साबेर है। इसमें वाइपर में .308/7.62x51एमएम की गोली और साबेर में .338 की गोली लगती है। वाइपर की रेंज 1 हजार मीटर, वहीं साबेर की रेंज 1500 मीटर बताई गई है। कंपनी के डायरेक्टर सतीश बताते हैं कि दोनों ही राइफल सेना और सरकारी एजेंसियों को बीच मशहूर हैं।

सेना को स्नाइपर राइफल उपलब्‍ध कराने के लिए लगभग 20 कंपनियों ने टेंडर भरा था, लेकिन ये कंपनियां बुलेट को सौदे में शामिल नहीं कर रही थीं इसलिए राइफल की खरीद पर निर्णय नहीं हो सका है।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी का दावा है कि भारत में पहली बार उन्होंने स्वदेशी तकनीक से स्नाइपर राइफल का मॉडल तैयार कर उसे बनाया है। गौरतलब है कि प्राइवेट कंपनियों के लिए रक्षा क्षेत्र के रास्ते मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही खोले गए थे।

फिलहाल कंपनी का लक्ष्य अपनी राइफल को टेस्ट में पास कराना है। यदि एसएसएस डिफेंस की राइफल टेस्ट में पास हो गई तो उसके बाद कंपनी अपनी कई और योजनाओं पर काम करेगी। फिलहाल कंपनी की फैक्ट्री 80 हजार स्कॉयर फीट से संचालित की जा रही है। सूत्रों के अनुसार कंपनी हथियारों के क्षेत्र में 20 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। सब कुछ ठीक रहने पर कंपनी दोनों राइफल को एक्सपोर्ट भी करने पर विचार रही है।

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