लगातार ड्यूटी से थक गई है बेंगलूरु पुलिस

पिछले 20 दिनों से हर रोज 15 घंटे से अधिक ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी, इंसपेक्टर से लेकर अधिकारी तक छुट्टियां रद्द कर रहे तैनात

By: Rajeev Mishra

Updated: 06 Jan 2020, 10:54 PM IST

बेंगलूरु.

बेंगलूरु पुलिस के 15 हजार कर्मी पिछले 20 दिनों से लगातार 15 घंटे से अधिक ड्यूटी कर रहे हैं और बुरी तरह थक गए हैं। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर शहर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही पुलिस कर्मियों की व्यस्तता बढ़ी और अभी तक उन्हें राहत नहीं मिली है। नए साल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर पुलिस कर्मी लगातार ड्यूटी पर रहे।

बेंगलूरु पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने कहा कि 'हमारे पुलिसकर्मी पहली जनवरी को सुबह 4 जबे तक ड्यूटी पर थे। उसी दिन वे फिर सुबह 10.30 बजे कार्यालय पहुंचे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा रिहर्सल में शामिल होना था। पीएम मोदी के दो दिवसीय दौरे के समय पूरा पुलिस बल 24 घंटे सक्रिय रहा।'

अनुमानत: हर पुलिसकर्मी सुबह 8.30 बजे ड्यूटी पर निकला और रात 11 बजे के बाद ही घर लौटा। अधिकारी (पुलिस उपायुक्त सहित) नाइट राउंड पर रहे। नाइट राउंड पर निकलने वाले अधिकारी शाम को 7 बजे घर लौटे और उसी रात 9.30 बजे फिर ड्यूटी पर पहुंचे। रात 9.30 बजे नाइट राउंड पर निकलने के बाद वे अगली सुबह 5.30 बजे घर लौटे। राव ने कहा कि जब सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरु हुआ तो कई अधिकारियों को अपनी छुट्टियां रद्द कर ड्यूटी पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि 'सीएए के खिलाफ और समर्थन में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए हमें पुलिस बल संतुलित करने के लिए अधिकारियों की छुट्टियां रद्द करनी पड़ी। शहर में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ तो कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती बनी। दिन के समय भीड़ की निगरानी करनी पड़ी तो रात के समय पुलिस सादी वर्दी में शहर के अलग-अलग हिस्सों में तैनात रही ताकि खुफिया सूचनाओं के आधार पर किसी संभावित विरोध के लिए तैयार रहे। इन सभी दिनों में सभी आठों पुलिस उपायुक्त अपने-अपने इलाके में नाइट राउंड पर रहे।' एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इंसपेक्टर और उससे निचे के अधिकारियों के लिए समस्या और गंभीर रही।

उन्होंने कहा 'पहले हमें विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए सुबह से शाम तक तैनात किया गया उसके बाद हमें पुलिस स्टेशन लौटना पड़ा ताकि कई घटनाओं की लंबित जांच की कार्यवाही पूरी करनी थी।Ó एक अधिकारी ने कहा कि 'ड्राइवरों की मुश्किलें भी बढ़ी। उन्हें तो आवश्यक रूप से पुलिस आयुक्त से लेकर इंसपेक्टर के साथ सुबह से लेकर मध्यरात्रि तक ड्यूटी करनी पड़ी। अलग-अलग शिफ्ट में अलग-अलग ड्राइवरों की व्यवस्था आपातकालीन परिस्थ्तियों जैसे विरोध प्रर्दन, नए साल का बंदोबश्त या प्रधानमंत्री के दौरे के समय कारगर नहीं होती हैं। ड्राइवर शहर के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। कुछ पुलिस क्वार्टर में भी रहते हैं। अमूमन ये मोटरबाइक में अपने पुलिस अधिकारी के घर अथवा पुलिस स्टेशन पहुंचते हैं जहां से वाहन लेकर निकलना होता है। इसी तरह रात में अथवा मध्यरात्रि में ड्यूटी पूरा होने के बाद उन्हें अपने मोटरबाइक में घर लौटना होता है।

Rajeev Mishra Reporting
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