scriptBengaluru ranks third in breast cancer cases | स्तन कैंसर के मामलों में बेंगलूरु तीसरे स्थान पर | Patrika News

स्तन कैंसर के मामलों में बेंगलूरु तीसरे स्थान पर

-1980 में प्रति एक लाख की आबादी पर 15 के मुकाबले अब 41 मरीज

बैंगलोर

Published: November 17, 2021 10:41:20 pm

बेंगलूरु. हैदराबाद और चेन्नई के बाद स्तन कैंसर के मामलों में बेंगलूरु देश में तीसरे स्थान पर है। बीते चार दशक में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। बेंगलूरु में वर्ष 1980 में जहां प्रति एक लाख की आबादी पर 15 मामले सामने आते थे, वहीं अब यह संख्या 41 पहुंच गई है।

breast cancer (symbolic photo)

चिकित्सकों के अनुसार स्तन कैंसर भारतीय शहरों में महिलाओं में पहला और सबसे आम कैंसर है। कैंसर के मामलों में इसकी 25 से 32 फीसदी हिस्सेदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है।

हर साल हजार से ज्यादा मरीज
किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. सी. रामचंद्र ने बताया कि अस्पताल में हर साल स्तन कैंसर के करीब एक हजार नए मामले सामने आते हैं। बीते एक दशक में देखा गया है कि ज्यादातर युवा महिलाएं स्तन कैंसर से पीडि़़त हो रही हैं। मरीजों की औसतन आयु अब 40-70 वर्ष से घटकर 30-50 पहुंच गई है। बीते कुछ वर्षों में 20-30 आयु वर्ग की महिलाएं भी इस कैंसर से प्रभावित हुई हैं।

उन्होंने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में प्रदेश की महिलाओं में सामने आने वाले कैंसरों में 27.9 फीसदी हिस्सेदारी स्तन कैंसर की थी।

10 फीसदी कैंसर ही आनुवंशिक
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शोमशेखर एस.पी. का कहना है कि तेजी से बढ़ते इन स्तन कैंसर के मामलों के पीछे कई एसे कारण हैं जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली, देर से बच्चा, स्तन पान की कमी मुख्य कारकों में हैं। जंग फूड ने समस्या और बढ़ा दी है। ज्यादातर महिलाएं बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) की समस्या से जूझ रही हैं। किसी का बीएमआइ जरूरत से ज्यादा है तो किसी की काफी कम। पहले ज्यादातर स्तन कैंसर को आनुवंशिक समझा जाता था पर सच्चाई यह है कि 10 फीसदी कैंसर ही आनुवंशिक होते हैं।

95 फीसदी गांठों में दर्द नहीं
मणिपाल अस्पताल की रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. रूपा के अनुसार अधिकांश स्तन कैंसर के मामलों में अंतिम अवस्था तक दर्द जैसे लक्षण सामने नहीं आते हैं। स्तन में होने वाले 95 फीसदी गांठों में दर्द नहीं होता है। इस बात को समझते हुए 30 वर्ष या इससे ज्यादा की आयु की महिलाओं को साल में कम-से-कम एक बार और स्तन की जांच करानी चाहिए। 45 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी जांच करानी चाहिए। जिन महिलाओं के पास समय नहीं है वे खुद से अपने स्तन की जांच कर सकती है।

अब धूप से करें स्तन कैंसर पर वार
विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन-डी के सेवन से स्तन कैंसर के खतरों को कम किया जा सकता है। इससे कई हजार जिंदगियां प्रतिवर्ष बचाई जा सकती हैं। वैसे तो धूप विटामिन-डी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। लेकिन महिलाएं अक्सर अपनी दिनचर्चा में इससे महरूम हो जाती हैं। विटामिन-डी इम्यून सिस्टम और कोशिका विभाजन को नियंत्रित करने में भी लाभकारी है। यह दोनों कैंसर की रोक के अहम कारक हैं।

विटामिन डी की उपयोगिता पर लोगों को जागरूक करने में लगी अमरीका की गैर सरकारी संस्थान विटामिन- डी काउंसिल का कहना है कि स्तन के ऊतकों में विटामिन डी रिसेप्टर होते हैं। विटामिन डी में इन रिसेप्टर्स को बांधे रखने की क्षमता होती है। इसके प्रभाव से आंकोजीन कोशिकाएं या तो मरने लगती हैं या फिर विकसित नहीं हो पाती हैं। कैंसर कोशिकाओं को शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने से रोकने में भी मदद मिलती है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि विटामिन-डी में स्तन कैंसर को रोकने की क्षमता है।

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