भव बिगड़े तो चिंता होनी चाहिए: आचार्य भव्यदर्शन

  • राजाजीनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 08 Apr 2021, 04:17 PM IST

बेंगलूरु. राजाजीनगर इंडस्ट्रियल टाउन स्थित विमलनाथ जिनालय में आचार्य भव्यदर्शन सूरी ने कहा कि ढाई हजार साल पुराना महावीर का शासन आज हमें अखंड रूप में प्राप्त होने के पीछे गणधर भगवंतों से लेकर सैकड़ों आचार्य भगवंतादि का अपूर्व योगदान है। जिनको यह शासन प्राप्त हुआ है उन जीवों का विशिष्ट सूर्योदय है। पुण्य के उदय से प्राप्त चीज निकल ना जाए, सफल बने, इसके लिए पुरुषार्थ करना होगा। धर्म की प्राप्ति और सफलता पुरुषार्थ के अधीन है।

मानव जन्म और जैन धर्म की प्राप्ति को सफलता की ओर ले जाने के लिए प्रचंड पुरुषार्थ की आवश्यकता है। आचार्य ने कहा कि भव बदलता है वह चिंता का विषय नहीं है, लेकिन भव बिगड़ता है वह चिंता का विषय बनना चाहिए।

अनुकंपा के बिना धर्म का आधार नहीं: विनयमुनि
बेंगलूरु. महावीर भवन अलसूर में विनयमुनि खिंचन ने कहा कि धर्म कहता है कि सुनने मे भी विवेक रखें। हम विकार से बचें। क्योंकि विकार आदत बन जाते हैं और ऐसी आदतें हमारी दुर्गति कर देती हैं। कान से हम स्व प्रशंसा सुनकर बहुत खुश होते हैं। कभी-कभी यह प्रशंसा झूठी और चापलूसी वाली होती है। जब तक हम हकीकत से रूबरू हों तब तक तो हम अपना पतन कर लिए होते हैं।

Santosh kumar Pandey Desk
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