गठबंधन सरकार के विरोध में भाजपा ने मनाया काला दिवस

गठबंधन सरकार के मुखिया के रूप में एच.डी. कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के विरोध में भाजपा ने काला दिवस मनाया।

By: शंकर शर्मा

Published: 24 May 2018, 09:46 PM IST

हुब्बल्ली-धारवाड़. राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार के मुखिया के रूप में एच.डी. कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के विरोध में भाजपा ने काला दिवस मनाया। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर के नेतृत्व में बुधवार को यहां भाजपा कार्यकत्र्ताओं ने देशपांडे नगर स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर काली पट्टी बांध कर प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर शेट्टर ने कहा कि यह दोनों पार्टियों का अपवित्र गठबंधन है। इस सरकार की आयु कुछ ही दिन रहेगी।


प्रदर्शनकारियों ने ‘गठबंधन सरकार को हटाएं, भाजपा को सत्ता में लाएं’ के नारे लगाए। प्रदर्शन में भाजपा नेता लिंगराज पाटील, मल्लिकार्जुन साहुकार, सेंट्रल क्षेत्र के अध्यक्ष तिप्पण्णा मज्जगी, रवि नायक, हनुमंतप्पा दोड्डमनी, कृष्णा गंडगालेकर, सिद्धू मोगलीशेट्टर, बीरप्पा खंडेकर, एम.एच. चल्लमरदशेख, दत्तमूर्ति कुलकर्णी, वसंत नाडजोशी, सदाशिव चौशेट्टी आदि ने भाग लिया।

...धारवाड़ में काला दिवस मनाया
कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार सत्ता में आने के विरोध में बुधवार को धारवाड़ के विवेकानंद सर्कल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने काला दिवस मनाया। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को अपवित्र गठबंधन बताकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने रोष जताया। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष नागेश कलबुर्गी, यल्लप्पा अरवालद, पार्षद विजयानंद शेट्टी, तवनप्पा अष्टगी, प्रकाश गोडबोले, सुनील मोरे, अरविंद एकनगौडर, मोहन रामदुर्ग आदि ने भाग लिया।

त्रुटियां सुधार लेने वाला खिलाड़ी ही होता है सफल
बेलगावी. आचार्य महेंद्रसागर सूरीश्वर ने बुधवार को यहां धर्मसभा में कहा कि क्रीड़ा के क्षेत्र में वह खिलाड़ी सफल और नामी होता है जो प्रशिक्षक के निर्देशानुसार अपनी त्रुटियों को सुधारता है। अपने खेल में निखार लाने के लिए खिलाड़ी को प्रशिक्षक की बात को मानना ही पड़ता है।


आचार्य ने कहा कि खेल के क्षेत्र में प्रशिक्षक होते हैं वैसे ही आध्यात्मिक क्षेत्र में भी प्रशिक्षक के स्थान पर गुरु होते हैं। धर्म जगत में धर्मी को धर्म क्षेत्र में सफल होने के लिए गुरु की बात को मानना ही पड़ता है। रुचिपूर्वक और श्रद्धापूर्वक गुरु वचनों को स्वीकार करने से उनकी बातों और अर्थ में श्रद्धा होती है।

एक ऐसा नियम है कि जिस भाव से जो क्रिया की जाती है वही क्रिया उसी भाव को बढ़ाती है। यदि शुभ क्रिया है तो शुभ भाव को बढ़ाएगी और अशुभ होगी तो अशुभ भाव को बढ़ाएगी। श्रद्धा जगने से मिथ्यात्व मोहनीय कर्म का क्षय होता है। आपकी श्रद्धा के विशिष्ट भाव को देखकर और गुरुवचन स्वीकार को देखकर अन्य अबुध जीवों को भी गुरुवचन स्वीकार का भाव जागता है और प्रेरणा मिलती है।


गुरु की बात स्वीकार करने से गुरु का विनय होता है। तीर्थंकर भगवंत की आज्ञा का पालन होता है। सुकृत की अनुमोदना आदि अन्य गुणों का भी यथा योग्य लाभ होता है। इसलिए बहुत ही श्रद्धापूर्वक गुरुवचन स्वीकारने में तत्पर बनना चाहिए। तभी हम धर्म और आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल हो सकेंगे।

शंकर शर्मा
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