मंत्रिमंडल विस्तार के बाद होगा भाजपा सरकार का पतन: कांग्रेस

विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष एसआर पाटिल का दावा

बेंगलूरु. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष एसआर पाटिल ने दावा किया कि राज्य सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद भाजपा का असली रंग उजागर हो जाएगा। मौजूदा सरकार के पतन की शुरुआत होगी।

पाटिल ने रविवार को बागलकोट में संवाददाताओं से कहा कि भाजपा नेता मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर भारी दबाव में हैं। मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद संगठन और सरकार में स्थिरता बरकरार रख पाना भाजपा नेताओं के लिए बड़ी चुनौती होगी। भाजपा वाले जुगाड़ करके सत्ता में आए हैं। मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने कहा था कि उपचुनाव के परिणाम आने के 24 घंटों के भीतर वे नए विधायकों को मंत्री बनाने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार कर देंगे, लेकिन महीने भर से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी विस्तार नहीं हो पाया है।

क्या मुख्यमंत्री सभी विभागों का कामकाज संभालने में समर्थ हैं? पाटिल ने दावा किया कि मंत्रिमंडल का विस्तार भाजपा नेताओं के लिए बड़ा सिरदर्द है और विस्तार के बाद उनकी हालत और खराब होगी। पाटिल ने कहा कि येडियूरप्पा ने हाल में पद से त्यागपत्र देने के संकेत दिए हैं, इसका कारण पार्टी में पड़ रहा दबाव व बिखराव ही है। ऐसे में येडियूरप्पा के मंत्रिमंडल का विस्तार करने के बाद त्यागपत्र देने में कोई संदेह नहीं है। उनके त्यागपत्र देने के बाद कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़कर सत्ता में वापसी करेगी। पाटिल ने कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि हमारी पार्टी छोड़कर गए नेता भाजपा में भी बने रहेंगे। हमारी पार्टी छोड़कर गए नेता कहीं भी टिक नहीं पाएंगे।

जो भी बने अध्यक्ष, समर्थन करेंगे
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए डीके शिवकुमार के नाम पाटिल ने कहा कि वे चाहते हैं कि इस बारे में पार्टी आलाकमान अति शीघ्र निर्णय करे। जो इस पद के योग्य होगा, उसे अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। यह पद चाहे किसी को भी दिया जाए, वे उसका समर्थन करेंगे। केजे जार्ज के साथ ईडी की पूछताछ के बारे में पाटिल ने कहा कि हम कांग्रेसी नेता अंग्रेजों की गोलियों का सामना करने से नहीं डरे हैं। भाजपा वाले ईडी को मोहरा बना कर हमें कभी डरा नहीं सकते। हमने देश को आजादी दिलाई है और हम किसी से डरने वाले नहीं हैं।

दौरों से कुछ नहीं होगा, दर्द समझें मोदी-शाह
पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह चाहे कितनी भी बार राज्य के दौरे पर क्यों न आएं, इससे राज्य का कोई भला होने वाला नहीं है। भाजपा के नेता नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के जरिए जातियों व धर्मों के बीच दीवारें खड़ी कर रहे हैं। उनको सीएए की चिंता सता रही है, जबकि राज्य के बाढ़ प्रभावितों का दर्र्द उनको समझ में नहीं आता है। पाटिल ने दावा किया कि भाजपा नेताओं के पास विपक्षी दलों का सामना करने की नैतिक हिम्मत ही नहीं है और इसी वजह से विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को टाल दिया गया है, इससे अधिवेेशन का महत्व ही खत्म हो गया है। विदेश प्रवास की आड़ में मुख्यमंत्री ने ऐसा किया है।

संतों का सिफारिश करना सही नहीं
हाल में वचनानंद स्वामी के मुरुगेश निराणी के पक्ष में वकालात करने का जिक्र करते हुए पाटिल ने कहा कि इस तरह के हालात हम पहली बार देख रहे हैं। साधु, संतों को समाज की भलाई, धर्म के प्रचचार, प्रसार के काम तक खुद को सीमित रखना चाहिए। किसी को मंत्री बनाने की इस तरह सार्वजनिक तौर मुख्यमंत्री से मांग करने का वाकया पहली बार देखा है।

येडियूरप्पा पर तरस आता है
पाटिल ने कहा कि सीएम येडियूरप्पा पर तरस आता है, क्योंकि बाढ़ से उपजे हालात से निपटने और नागरिक हितों के अनुसार प्रशासन चलाने वाले मंत्री ही उनके मंत्रिमंडल में नहीं हैं। उनको जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार करके लोगों को न्याय दिलाना चाहिए, क्योंकि विस्तार नहीं होने से जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

Saurabh Tiwari
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