11 हारी सीटों पर जीतने लायक चेहरे की तलाश में जुटी भाजपा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 मेें से 25 जीतनेे का लक्ष्य दिया है लेकिन पार्टी के लिए कई सीटों पर जीतने लायक चेहरों को तलाशना मुश्किल हो गया है।

By: शंकर शर्मा

Published: 24 Jul 2018, 10:21 PM IST

बेंगलूरु. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 मेें से 25 जीतनेे का लक्ष्य दिया है लेकिन पार्टी के लिए कई सीटों पर जीतने लायक चेहरों को तलाशना मुश्किल हो गया है।

जद-एस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार के सत्ता में आने और दोनों दलों के बीच लोकसभा चुनाव में सीटों का तालमेल तय होने के कारण भाजपा को पिछले चुनाव में हारी 11 सीटों के लिए जीतने में सक्षम उम्मीदवार खोजना कठिन हो गया है जबकि जीती गई सीटों पर कब्जा बनाए रखने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


वर्ष २०१४ के लोकसभा चुनाव में हारी गई 11 सीटों में से 8 सीटें तो ऐसी हैं जहां पार्टी का कोई नेता जीतने की स्थिति में नहीं है। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस व जद-एस के बीच तालमेल होने से भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव की राह और कठिन होना तय है। जीतने योग्य उम्मीदवार तलाशना मुश्किल होते देख प्रदेश के भाजपा नेताओं ने अब कांग्रेस व जद-एस के असंतुष्ट नेताओं पर नजरें गड़ा रखी हैं।

लोकसभा चुनाव में अभी कई माह बाकी हैं लिहाजा भाजपा ने ऑपरेशन कमल के जरिए अथवा पार्टी में शामिल करने के जरिए प्रमुख नेताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के प्रयास अभी से शुरू कर दिए हैं।


सूत्रों के अनुसार भाजपा तुमकूरु से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य मुद्देहनुमे गौड़ा पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। भाजपा अपने जनाधार वाली चित्रुदर्गा सीट से कांग्रेस के सांसद बी एन चंद्रप्पा को भी पार्टी में शामिल करने के प्रयास में जुटी है। इस सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के जनार्दन स्वामी चंद्रप्पा के हाथों 1 लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हारे थे।


लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शीघ्र ही राज्य के दौरे पर आने वाले हैं। राज्य प्रवास के दौरान वे प्रदेश के नेताओं से आगामी लोकसभा चुनाव विशेषकर पिछले चुनाव में हारी गई 11 सीटों के लिए सक्षम उम्मीदवारों के चयन के बारे में जानकारी लेंगे। इसे लेकर प्रदेश के नेता परेशान हैं।


चिक्कोड़ी लोकसभा सीट को लेकर भाजपा थोड़ी आशांवित है क्योंकि इस सीट पर पूर्व मंत्री उमेश कत्ती का अच्छा प्रभाव है। पिछल चुनाव में उनके भाई रमेश कत्ती मात्र 3 हजार वोटों के अंतर से प्रकाश हुक्केरी के हाथों चुनाव हार गए थे। पार्टी एक बार फिर रमेश कत्ती को यहां से उतारने की स्थिति में है।


गुलबर्गा सीट से पिछले चुनाव में भाजपा के रेवु नायक बेलमगी करीब 75 हजार मतों के भारी अंतर से मल्लिकार्जुन खरगे से हार गए थे। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज बेलमगी जद-एस में शामिल हो गए हैं। अब भाजपा को खरगे से मुकाबले के लिए दमदार उम्मीदवार की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

जहां तक रायचूर सीट का सवाल है, पिछले चुनाव में कांग्रेस के बी.वी. नायक के खिलाफ भाजपा ने अरकेरा शिवनगौड़ा नायक को चुनाव में उतारा था और वे केवल 1499 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। लेकिन बतौर सांसद नायक ने क्षेत्र में अच्छा काम किया और चुनाव में जनतादल-एस का साथ मिल जाने पर कांग्रेस उन्हीं को दुबारा इस सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है।
चामराजनगर में कांग्रेस के मौजूदा सांसद आर. धु्रवनारायण ने पिछले चुनाव में भाजपा के ए.आर. कृष्णमूर्ति को करीब 1 लाख 41 हजार वोटों के अंतर से हराया था। इस सीट के लिए भाजपा को नया प्रत्याशी तलाश करना ही होगा। बेंगलूरु ग्रामीण सीट पर कांग्रेस के डी.के. सुरेश ने भाजपा के मुनिराजू गौड़ा को 2.31 लाख वोटों के अंतर से हराया था। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इसी क्षेेत्र की राजराजेश्वरी नगर सीट से भी चुनाव हारकर मुनिराजू गौड़ा ने अपनी अयोग्यता को फिर से साबित कर दिया है।


चिकबलापुर सीट से कांग्रेस के एम. वीरप्पा मोइली ने दूसरी बार चुनाव लड़ा था और भाजपा के बीएन बच्चे गौड़ा को इस सीट पर करीब 9 हजार मतों से परास्त कर के लोकसभा में प्रवेश किया लेकिन अधिक उम्र हो जाने के कारण बच्चेगौड़ा को इस बार लोकसभा का टिकट मिलने को संशय है।


कोलार सीट पर कांग्रेस के के.एच. मुनियप्पा का दबदबा अब भी कायम है लिहाजा इस सीट पर भी भाजपा की दाल गलती नजर नहीं आ रही क्योंकि जिले में पार्टी के पास ऐसा कोई चेहरा ही नहीं है जो मुनियप्पा को चुनौती दे सके। मुनियप्पा लगातार सात बार जीत चुके हैं।

कांग्रेस व जद-एस गठबंधन से मुश्किल
हासन जिले की एक सीट को छोड़ शेष सभी विधानसभा सीटों पर जद-एस का कब्जा है लिहाजा वहां से जीतना भाजपा के लिए दिन में सपने देखने जैसा है। इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इस बार देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवण्णा के यहां से चुनाव लडऩे की चर्चा है।


मण्ड्या में भी भाजपा का कोई जनाधार नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में जद-एस के सी.एस. पुट्टराजू ने कांग्रेस की रम्या को महज 5 हजार वोटों से हराया था लेकिन इस बार वहां से देवेगौड़ा खुद चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं लिहाजा भाजपा के जीतने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं है।

कांग्रेस व जद-एस के बीच गठजोड़ हो जाने की स्थिति में मैसूरु-कोडुगू, दावणगेरे तथा कोप्पल सीटों पर कब्जा बरकरार रखना आसान नहीं होगा। इन सीटों से पार्टी के मौजूदा सांसद प्रताप सिम्हा, जी.एम. सिद्धेश्वर तथा करड़ी संगण्णा को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। मैसूरु-कोडुगू से कांग्रेस के गलियारे में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या का नाम चर्चा में है। हालांकि, वे लोकसभा चुनाव लडऩे की संभावनाओं को खारिज करते रहे हैं।

शंकर शर्मा
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