भाजपा नेता के बिगड़े बोल, राहुल की तुलना ‘जोकर’ से

भाजपा नेता के बिगड़े बोल, राहुल की तुलना ‘जोकर’ से

Santosh Kumar Pandey | Publish: Apr, 19 2019 09:07:22 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

राजनेताओं की अशालीन और अमर्यादित होती भाषा लगातार लोकतंत्र में भाषाई मर्यादा तोड़ रही है। इसी क्रम में अब भाजपा विधायक बसवराज बोम्मई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘हीरो’ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को ‘जोकर’ कहा है।

हुब्बल्ली. राजनेताओं की अशालीन और अमर्यादित होती भाषा लगातार लोकतंत्र में भाषाई मर्यादा तोड़ रही है। इसी क्रम में अब भाजपा विधायक बसवराज बोम्मई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘हीरो’ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को ‘जोकर’ कहा है।

बोम्मई ने शुक्रवार को कहा कि अब वोटर ही यह तय करेंगे कि कौन ‘हीरो’ है और कौन ‘जोकर’ है। बोम्मई से राहुल और कुमारस्वामी का मजाक उड़ाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, राहुल और कुमारस्वामी जिस तरह से बात करते हैं उसमें वे अपनी सोच, भाषा शैली और शारीरिक हाव-भाव की वजह से खुद ही अपना मजाक उड़वाते हैं। लोग ही अब तय करेंगे कि कौन ‘हीरो’ है और कौन ‘जोकर’ है।

लिंगायत को अलग धर्म के रूप में मान्यता देने की कांग्रेस की पहल की आलोचना करते हुए बोम्मई ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने लिंगायत मुद्दे का इस्तेमाल उसी तरह किया जिस तरह ब्रिटिश सरकार ने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को अपनाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लिंगायत मुद्दे का इस्तेमाल अपने चुनावी फायदे के लिए किया। यह एक असफल कोशिश थी। अब पार्टी के सदस्यों के बीच ही आंतरिक कलह चल रही है। एक तरफ जहां डीके शिवकुमार ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने के मुद्दे पर पिछली सरकार की तरफ से माफी की पेशकश की। वहीं दूसरी तरफ एमबी पाटिल ने उनकी माफी को नजरअंदाज किया।

उन्होंने कहा कि लिंगायत या वीरशैव के लिए अलग धर्म की मांग पर पहले कांग्रेस को अपनी पार्टी के अंदर ही इस मुद्दे पर फैसला कर लेना चाहिए।

बोम्मई ने राज्य की मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी नीत गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया कि वह उत्तर कर्नाटक के हितों पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जद-एस और कांग्रेस गठबंधन सरकार के विकास का एजेंडा केवल हासन और मांड्या ही सीमित है। राज्य सरकार ने उत्तर कर्नाटक के विकास के मुद्दों को दरकिनार कर रखा है।

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