दुर्लभ नीमन पिक बीमारी से पीडि़त डेढ़ वर्ष के बच्चे को मिली नहीं जिंदगी

- बोन मैरो प्रत्यारोपण सफल

 

 

By: Nikhil Kumar

Updated: 01 Mar 2020, 12:43 PM IST

बेंगलूरु. दुर्लभ नीमन पिक (टाइप-सी) बीमारी से पीडि़त डेढ़ वर्ष के कोलकाता के एक बच्चे का बोन मैरो प्रत्यारोपण (bone marrow transplant - बीएमटी) कर शहर एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे नई जिंदगी दी। चिकित्सकों के अनुसार लाखों में एक बच्चा इस बीमारी का शिकार होता है। ज्यादातर पीडि़त बच्चों की दस वर्ष की आयु तक मौत हो जाती है।

मरीज मेहराज (परिवर्तित नाम) के जन्म के कुछ सप्ताह में ही पिता ने उसके पेट में कुछ अजीब पाया। कोलकाता के एक अस्पताल में जांच में पता चला कि मेहराज के पेट, प्लीहा (स्प्लिन) और यकृत का आकार सामान्य से बड़ा था। विस्तृत जांच में Niemann-Pick disease type C के रूप में बीमारी सामने आई। उसे साइटोमेगालो वायरस (सीएमवी) संक्रमण भी था।

दात्री पंजीयन में मिला बोन मैरो
नारायण हेल्थ सिटी में बाल कैंसर रोग व बीएमटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील भट्ट ने शनिवार को बताया कि मेहराज को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। बीएमटी ही उसका पूर्ण उपचार था। दानी (डोनर) और प्रापक (रेसिपिएंट) के समुच्चय जीन मिलने चाहिए जिसे मानव ल्यूकोसेट प्रतिजन (एचएलए) कहते हैं। परिवार में मैचिंग डोनर नहीं मिल सका। करीब एक-तिहाई मरीजों को एचएलए का मिलता-जुलता समुच्चय उनके भाई-बहनों से मिल सकता है। जबकि दो-तिहाई को असंबद्ध डोनर पर निर्भर रहना पड़ता है। संयोग से गैर सरकारी संस्था व असंबद्ध ब्लड स्टेम सेल डोनर पंजीयन दात्री. में मैचिंग डोनर मिला।

50 फीसदी मरीज बच्चे
उन्होंने कहा कि यकृत और फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे थे। जो बीएमटी में सबसे बड़ी बाधा थी। बीएमटी के दौरान मेहराज को श्वसन सहायता प्रणाली पर रखना पड़ा। बीएमटी के बाद मेहराज पूरी तरह से रोग मुक्त है। यकृत और फेफड़े भी प्राकृतिक रूप से काम कर रहे हैं। अब वह आम बच्चों की तरह है। डॉ. भट्ट ने बताया कि दुर्लभ बीमारियों के 50 फीसदी से ज्यादा मरीज बच्चे होते हैं।

जानिए इस बीमारी को
नीमन पीक जेनेटिक कारणों से होने वानी दुर्लभ बीमारी है। यह कोशिकाओं के अंदर वसा (कोलेस्ट्रॉल और लिपिड) को मेटाबोलाइज (पचाने) करने की शरीर की क्षमता को प्रभावित करती है। नीमन पीक मस्तिष्क, यकृत, प्लीहा, बोन मैरो और गंभीर मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करता है। कोलेस्ट्रॉल व अन्य वसा यकृत, प्लीहा या फेफड़ों में जमा हो मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं।

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Nikhil Kumar Reporting
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