बोर्ड को नहीं पता कहां गए १४४३० परीक्षार्थी

प्रदेश बोर्ड १०वीं की परीक्षा गुरुवार को समाप्त हो गई। पंजीकृत ८,४१,६६६ विद्यार्थियों में से करीब २५ हजार विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 04 Apr 2019, 08:21 PM IST

बेंगलूरु. प्रदेश बोर्ड १०वीं की परीक्षा गुरुवार को समाप्त हो गई। पंजीकृत ८,४१,६६६ विद्यार्थियों में से करीब २५ हजार विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।

शिक्षाविदों ने मांग की है कि अनुपस्थित विद्यार्थियों या उनके स्कूल से कारण पूछा जाना चाहिए। क्योंकि कई बार स्कूल उन विद्यार्थियों को परीक्षा देने से रोक देते हैं, जिनके परीक्षा में फेल होने का डर रहता है। ऐसे मामले कई बार प्रकाश में आ चुके हैं। दूसरी वजह हो सकती है कि विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा दिखाने के लिए स्कूल ऐसे विद्यार्थियों का पंजीकरण कराते हैं जो वास्तव में हैं ही नहीं। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों की संख्या घटने का यह एक बड़ा कारण है। कर्नाटक माध्यमिक शिक्षा परीक्षा बोर्ड (केएसइइबी) की निदेशक सुमंगला वी. ने बताया कि कक्षा में ७५ फीसदी से कम उपस्थिति होने के कारण १०,५७० विद्यार्थियों को केएसइइबी ने हॉल टिकट जारी नहीं किया था।
शेष विद्यार्थी परीक्षा में शामिल क्यों नहीं हुए, इसकी जानकारी बोर्ड को नहीं है। विद्यार्थी अगर स्कूल के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सके हों तो लिखित शिकायत पर कार्रवाई होगी।

एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक के महासचिव डी. शशि कुमार ने बताया कि नकली विद्यार्थियों का पंजीकरण करके बच निकलना आसान नहीं है। केएसइइबी को चाहिए कि ऐसे स्कूलों की पहचान कर उचित कदम उठाए। कुछ स्कूलों के कारण सभी स्कूल बदनाम होते हैं। नाम नहीं छापने के शर्त पर प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि नियमानुसार जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या २५ से कम है उन्हें सरकार अनुदान नहीं देती है।

इससे बचने के लिए ऐसे कई स्कूल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर दिखाते हैं। साफ है कि जो विद्यार्थी हैं ही नहीं वे परीक्षा कहां से देंगे। लेकिन स्कूलों का काम चलता रहता है।

Santosh kumar Pandey Desk
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