लड़कों के हॉस्टल में रखा ट्रांसजेंडर बच्चे को

लड़कों के हॉस्टल में रखा ट्रांसजेंडर बच्चे को
bangalore news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 09 2016 11:47:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

सत्रह साल के एक नाबालिग ट्रांसजेंडर को बॉयस हॉस्टल में लड़कों के साथ रखा गया है जबकि यह ट्रांसजेंडर बच्चा खुद की पहचान एक लड़की के रूप में करता है

बेंगलूरु. सत्रह साल के एक नाबालिग ट्रांसजेंडर को बॉयस हॉस्टल में लड़कों के साथ रखा गया है जबकि यह ट्रांसजेंडर बच्चा खुद की पहचान एक लड़की के रूप में करता है। पिछले दो सप्ताह से वह हॉस्टल के 300 लड़कों के साथ रह रहा है और वहां उसे तमाम तरह की मानसिक यातनाओं से गुजरना पड़ रहा है।


कर्नाटक ट्रांसजेंडर कमिटी ने इस मामले की निंदा करते हुए कहा कि वह खुद को एक लड़की की तरह महसूस करती है लेकिन इसके बावजूद बिना उसकी सहमति के उसे बॉयज होम में रखा गया है। नाबालिग ट्रांसजेंडरों के रहने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है।

लैंगिक अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली संस्था ऑनडेड की संस्थापक अक्काई पद्मशाली ने कहा कि जब उन्होंने हॉस्टल का दौरा किया तो उसने बताया कि लड़के उसे प्रताडि़त कर रहे हैं। उसने रोते हुए बताया कि वह लड़कों के साथ नहीं रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति कानून को बहुत ही संवेदनशील होना पड़ेगा। कोई भी फैसला करने से पहले बच्चों के मनोविज्ञान को समझना पड़ेगा। उसने बॉयज होम के कुछ लड़कों के खिलाफ छेड़छाड़ करने की शिकायत की है, हम उन लड़कों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।

बेंगलूरु (अर्बन) की जिला बाल सुरक्षा अधिकारी दिव्या नारायण अप्पा का कहना है कि इस ट्रांसजेडर बच्चे के अंदर लड़कियों जैसी प्रवृत्ति अधिक है और उसने लड़की बनने की इच्छा भी जताई है। लेकिन अभी तक लिंग परिवर्तन के लिए उसकी कोई सर्जरी नहीं की गई है। वे चाहती हैं कि कोई भी फैसला लेने से पहले बच्चे की पर्याप्त काउंसलिंग की जाए। इस ट्रांसजेंडर बच्चे की मां ने पुलिस में शिकायत की थी कि वह अब ट्रांसजेंडरों के समूह में रहने लग गया है जिसके बाद पुलिस ने उसे चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी ( सीडब्लूएस) में भेज दिया था।

&इस तरह के बहुत से मामले हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्टाफ की कमी और ट्रांसजेंडर्स के लिए अलग से घर बनाने में संसाधनों की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। ऐसे हालात में उन्हें पर्याप्त काउंसलिंग की जरूरत होती है।      
 कृपा अल्वा, कर्नाटक राज्य की बाल अधिकार संरक्षण समिति की अध्यक्ष
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