scriptBSY in BJP key panel, will oversee party mission south | कर्नाटक के बाद येडियूरप्पा के सहारे अब 'मिशन दक्षिण' में जुटी भाजपा | Patrika News

कर्नाटक के बाद येडियूरप्पा के सहारे अब 'मिशन दक्षिण' में जुटी भाजपा

दूसरे दक्षिणी राज्यों में भी विस्तार की कोशिश

बैंगलोर

Published: August 18, 2022 02:35:14 am

बेंगलूरु. भाजपा संसदीय बोर्ड bjp parliamentary board में नामित किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा b s yediyurappa ने राज्य में भाजपा को सत्ता में वापस लाने और दक्षिण भारत में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प किया।
लंबे समय बाद दिग्गज लिंगायत नेता के चेहरे पर मुस्कान दिखी और वे पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी को लेकर उत्साहित नजर आए। भाजपा संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल किए जाने के बाद येडियूरप्पा को बधाई देने के लिए उनके आवास पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई समेत वरिष्ठ नेताओं का तांता लग गया।
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कभी नहीं की किसी पद की उम्मीद
बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा 'मुझे पार्टी के नेतृत्व द्वारा एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैंने कभी किसी पद की उम्मीद नहीं की थी। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, मेरा एकमात्र उद्देश्य राज्य में भाजपा को सत्ता में वापस लाना था। जब मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की, तो उन्होंने अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा।Ó
बोम्मई और अन्य कई पार्टी नेताओं के साथ संवाददाताओं से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इन नई जिम्मेदारियों को अत्यंत विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं। वे सघन यात्राएं करेंगे और राज्य में भाजपा को सत्ता में वापस लाने के साथ ही अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में मजबूत करने का प्रयास करेंगे।
bommai.jpgसक्रिय कार्यकर्ताओं को नहीं छोड़ेगी पार्टी
उन्होंने खुद को एक अच्छा उदाहरण बताते हुए कहा कि भाजपा सक्रिय साधारण कार्यकर्ताओं को नहीं छोड़ेगी। वे इस बात को नहीं मानते कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन सेवानिवृत्ति के क्षेत्र हैं। पार्टी के नेताओं ने इसे प्रमाणित भी किया है। वे अपनी अंतिम सांस तक संगठन के लिए काम करते रहेंगे।

पीएम मोदी से की फोन पर बात, जताया आभार
येडियूरप्पा कार्यालय के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर धन्यवाद दिया। प्रधान मंत्री ने बदले में कहा कि पार्टी को मजबूत करने और न केवल कर्नाटक में बल्कि पूरे दक्षिण भारत में सत्ता हासिल करने के लिए उनकी सेवाओं की जरुरत है।
Watch Video : कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने क्यों कहा ‘मिल गया कई हाथियों का बल’

 

... और नहीं रहा उम्र का बंधन
येडियूरप्पा ने 26 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफा देने का कारण उनकी बढ़ती उम्र को माना गया। भाजपा में 75 वर्ष से अधिक के नेताओं को निर्वाचित कार्यालयों से बाहर रखने का एक अलिखित नियम भी है। पार्टी हलकों में कई लोगों को लगता है कि येडियूरप्पा की नियुक्ति केंद्रीय नेतृत्व की ओर से एक संदेश देने का एक प्रयास है कि अभी भी अनुभवी नेताओं का बहुत सम्मान है। कुछ वर्गों और विशेषकर कांग्रेस की ओर से लिंगायत नेता को दरकिनार करने के आरोप लगते रहे हैं।
दिए थे राजनीति से संन्यास के संकेत
पार्टी नेतृत्व का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि येडियूरप्पा ने हाल ही में अपनी चुनावी राजनीति के अंत का संकेत देते हुए कहा था कि वह बेटे बीवाइ विजयेंद्र के लिए शिकारीपुर विधानसभा सीट खाली कर देंगे। चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस महीने की शुरुआत में अपनी बेंगलूरु यात्रा के दौरान उनसेे मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि भेंट के दौरान इस विषय में बात हुई थी। केंद्रीय नेतृत्व सुनिश्चित करना चाहता था कि येडियूरप्पा को खुद को नजरअंदाज महसूस नहीं करें। क्योंकि, उनके सक्रिय नहीं रहने पर राज्य में पार्टी की संभावनाएं प्रभावित होंगी।
नियुक्ति येडि के लिए प्रोन्नति समान
पार्टी के एक नेता नेता ने कहा कि निश्चित रूप से यह येडियूरप्पा की पदोन्नति है क्योंकि, सभी यह सोच रहे थे कि उनकी राजनीति अब समाप्ति की ओर है। पार्टी को निश्चित तौर पर उनकी आवश्यकता है। पार्टी ने उनकी ताकत को महसूस किया है इसका उपयोग करना चाहती है।

लिंगायत मतों पर नजर
दरअसल, येडियूरप्पा के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद कांग्रेस लिंगायत मतों को आकर्षित करने की योजना बनाई थी जो पारंपरिक रूप से भाजपा समर्थक माने जाते हैं। लेकिन, येडियूरप्पा को पार्टी की निर्णय करने वाली शीर्ष निकाय में शामिल किए जाने के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि हालांकि, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी एक लिंगायत हैं लेकिन, लिंगायत समुदाय पर येडियूरप्पा के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वह अभी भी न केवल समुदाय से सबसे बड़े नेता हैं, बल्कि एक जन नेता भी हैं।

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