कोरोना मरीजों के फेफड़े पर अध्ययन को कोई तैयार नहीं

राज्य में 44 से अधिक मौतें मगर नहीं लिए गए नमूने, आरजीयूएचएस और आइसीएमआर ने दिए शोध पर बल, मगर सुरक्षा का मुद्दा भारी

By: Rajeev Mishra

Published: 28 May 2020, 10:18 AM IST

बेंगलूरु.

फेफड़ों पर कोविड-19 के पडऩे वाले प्रभावों तथा शरीर के विभिन्न अंगों में इसकी प्रसार पद्धति को जानने के लिए कोरोना से मरने वाले मरीजों के फेफड़ों के उत्तकों (टिश्यूज) का अध्ययन कारगर साबित हो सकता है। लेकिन, कोई भी शोधकर्ता इसके लिए तैयार नहीं है।

कोविड-19 मरीजों का इलाज करने वाले बेंगलूरु के मुख्य अस्पताल राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरजीयूएचएस) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने कोरोना से मरने वाले मरीजों के फेफड़े की बायोप्सी करवाने का प्रावधान किया है एवं प्रस्ताव भी आमंत्रित किए हैं। मगर कोई भी इसके लिए आगे नहीं आया।

प्रावधान है पर कोई आगे नहीं आया

आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ.एस.सच्चिदानंद ने कहा कि 'हमने एक प्रावधान किया है जिसके तहत कोई भी कोविड-19 से होने वाली मौतों में फेफड़ों को होने वाली क्षति का अध्ययन कर सकता है। लेकिन, अभी तक कहीं से कोई प्रस्ताव नहीं आया है।' राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त पंकज पांडे ने भी कहा कि 'आरजीयूएचएस ने फेफड़ों की बायोप्सी कर अध्ययन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। लेकिन, शोध के लिए कोई शोधकर्ता आगे नहीं आया है।'दरअसल, पिछले 10 मार्च से राज्य में अभी तक कोविड-19 से 44 मरीजों की मौत हो चुकी है। परंतु किसी एक भी मरीज के फेफड़े या हृदय से उत्तकों को नमूना इकट्ठा नहीं किया गया है। केवल एक कोविड-19 मरीज की ऑटोप्सी हुई है जिसकी अप्राकृतिक मौत हुई थी। उस मरीज ने अस्पताल में ही आत्महत्या कर ली थी।

फेफड़े की सतह को क्षतिग्रस्त कर देता है वायरस

दरअसल, बायोप्सी एक ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसके तहत शरीर से कोशिकाओं (सेल) और उत्तकों (टिश्यू) का एक नमूना प्रयोगशाला जांच के लिए निकाला जाता है। इससे रोग की प्रकृति और शरीर में उसके प्रसार के बारे में जानकारी मिलती है। चीन सहित विश्व के कुछ अन्य देशों ने फेफड़े के नमूने इकट्ठा कर उसके अध्ययन किए हैं। चीन में प्रकाशित ऐसे ही एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण गैसीय विनिमय करने वाली फेफड़े की सतह जो रक्त में ऑक्सजीन की सांद्रता बनाए रखती हैं और श्वसन प्रक्रिया को पूरा करती हैं उन्हें काफी नुकसान पहुंचा। आइसीएमआर ने भी फेफड़े तथा मानव शरीर के अन्य अंगों पर कोरोनो वायरस के पडऩे वाले प्रभावों पर शोध की आवश्यकता को रेखांकित किया है और देश में कोविड-19 से होने वाली मौतों पर मेडिको-लीगल शव परीक्षण के लिए मानक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नमूना प्राप्त करना आसान नहीं

दरअसल, कोरोनावायरस पीडि़तों के फेफड़ों के नमूनों पर शोध को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों में से एक सुरक्षा है। बेंगलूरु मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक प्रोफेसर ने कहा कि कोविड -19 मौत मामलों में फेफड़े के ऊतकों का नमूना प्राप्त करना आसान नहीं है। इसके लिए डॉक्टरों को बहुत सावधानी बरतनी होगी। वहीं, पीडि़त परिवारों की सहमति प्राप्त करने जैसे नैतिक मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। परिणामस्वरूप कोई भी अनुसंधान उद्देश्यों के लिए फेफड़े या अन्य बायोप्सी को लेकर इच्छुक नहीं है।

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Rajeev Mishra Reporting
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