आरक्षण को लेकर समिति गठन करने का औचित्य नहीं: सिद्धू

कहा, फैसला रद्द किया जाए

By: Sanjay Kulkarni

Published: 19 Mar 2021, 09:19 PM IST

बेंगलूरु. राज्य में संवैधानिक पिछडा आयोग अस्तित्व में होने के बावजूद कुछ समुदायों की आरक्षण की मांग पर सिफारिशों के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करना अतार्किक है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या ने यह बात कही।
आनंदराव चौराहे पर पिछड़ा वर्ग समिति की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत इस समिति के गठन के फैसले को निरस्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय कर रही है। वर्ष 2020-21 के बजट में पिछड़े वर्गों के छात्रावासों के लिए 395 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। वहीं वर्ष 2021-22 के बजट में इस अनुदान में 100 करोड़़ रुपए की भारी कटौती के साथ 295 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
पिछड़े वर्गों के हितों की अनदेखी
उन्होंने कहा इस वित्तीय वर्ष के बजट में जहां दो प्रभावी समुदायों के निगमों को 1 हजार करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया वहीं 16 पिछड़े समुदायों को कुल मिलाकर 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार के लिए पिछड़े वर्गों का हित कोई मायने नहीं रखता है।
उन्होंने कहा कि 200 से अधिक जातियों के विकास के लिए गठित देवराज अर्स विकास निगम को 2 हजार करोड़ रुपए का आवंटन करने की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया है।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री एचएम रेवण्णा, विधायक भैरती सुरेश पूर्व महापौर रामचंद्रप्पा, विधान परिषद के पूर्व सदस्य एमडी लक्ष्मीनारायण उपस्थित थे।

Sanjay Kulkarni Reporting
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