कावेरी जल विवाद पर कल उच्चतम न्यायालय सुनाएगा फैसला

Kumar Jeevendra Jha

Publish: Feb, 15 2018 10:26:39 (IST)

Bengaluru, Karnataka, India
कावेरी जल विवाद पर कल उच्चतम न्यायालय सुनाएगा फैसला

शीर्ष अदालत पर टिकी निगाहें
बेंगलूरु और कावेरी बेसिन में कड़ी सुरक्षा

बेंगलूरु.नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय की एक विशेष पीठ शुक्रवार को कावेरी जल विवाद निपटारा पंचाट के वर्ष 2007 के अंतिम फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसले सुना सकती है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। पुदुचेरी ने पंचाट के अंतिम फैसले को चुनौती नहीं दी थी।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ शुक्रवार को पंचाट के ११ साल पुराने फैसले को चुनौती देनी वाली राज्यों की याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। पिछले साल २० सितम्बर को अंतिम सुनवाई के बाद जस्टिस मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविकलर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले महीने शीर्ष अदालत ने चार सप्ताह में फैसला सुनाने की बात कही थी। इस बीच, बेंगलूरु सहित राज्य के कावेरी बेसिन में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
फैसले पर टिकी दो राज्यों की निगाहें
पंचाट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर दो पड़ोसी राज्यों-कर्नाटक और तमिलनाडु की निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों राज्यों के बीच कम बारिश वाले वर्ष के दौरान पानी के बंटवारे को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है और मामले को सुलझाने के लिए शीर्ष अदालत को दखल देना पड़ता है। वर्ष 2016 में भी दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। कर्नाटक ने गंभीर सूखे की स्थिति के कारण तमिलनाडु के लिए पानी छोडऩे से मना कर दिया था। बाद में शीर्ष अदालत ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोडऩे का आदेश दिया जिसके कारण बेंगलूरु में हिंसा भड़क गई थी और शहर के एक हिस्से में कफ्र्य लगाना पड़ा था। राज्य में दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण शीर्ष अदालत का फैसला काफी अह्म माना जा रहा है।
पानी के हिस्से से कोई पक्ष संतुष्ट नहीं
कर्नाटक चाहता है कि तमिलनाडु को जल आवंटन कम करने के लिए शीर्ष अदालत आदेश जारी करे, जबकि तमिलनाडु का कहना है कि कर्नाटक को जल आवंटन कम किया जाए। अंतिम सुनवाई के दिन तमिलनाडु के वकील ने पीठ से राज्य के पानी का हिस्सा कम नहीं करने की अपील की थी। पंचाट ने तमिलनाडु में 192 टीएमसी फीट (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) को कर्नाटक द्वारा मेटटूर बांध में छोडऩे के आदेश दिए थे जबकि कर्नाटक को 270 टीएमसी फीट, केरल को 30 टीएमसी आवंटित किया गया था और पुदुचेरी को 6 टीएमसी आवंटित किया गया था।

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