जो बढ़ा रहे देश का मान, Central Government ने उनके साथ किया ऐसा काम

जो बढ़ा रहे देश का मान, Central Government ने उनके साथ किया ऐसा काम

Sanjay Kumar Kareer | Publish: Jun, 20 2019 07:56:42 PM (IST) | Updated: Jun, 20 2019 07:58:29 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

इसरो वैज्ञानिकों के वेतन में कर दी कटौती, पिछले 22 सालों से मिल रही प्रोत्साहन राशि पर चली कैंची, सरकार के निर्णय पर वैज्ञानिकों ने जताई निराशा

बेंगलूरु. चंद्रयान-2 की तैयारियों में जुटे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक जहां मिशन को सफल बनाने के लिए जी-जान से जुटे हैं, वहीं केंद्र सरकार उनकी तनख्वाह काटने में लगी है। केंद्र सरकार के ताजा आदेश में इसरो वैज्ञानिकों व इंजीनियरों को वर्ष 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रहे प्रोत्साहन अनुदान बंद कर दिया गया है।

पत्रिका के पास सरकार के आदेश की प्रति है जिसमें आगामी 1 जुलाई 2019 से यह प्रोत्साहन राशि बंद करने को कहा गया है। आदेश के मुताबिक अंतरिक्ष विभाग के सभी डी, ई, एफ और जी श्रेणी के वैज्ञानिकों को यह राशि अब 1 जुलाई से नहीं मिलेगी। वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने, इसरो की ओर आकर्षित करने और संस्थान छोड़कर नहीं जाएं इसके लिए यह राशि देने की शुरुआत 1 जनवरी 1996 को की गई थी।

केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग ने अंतरिक्ष विभाग को सलाह दी है कि वह इस प्रोत्साहन राशि को बंद करे। इसकी जगह पर परफार्मेंस रिलेटेड इनसेंटिव स्कीम (पीआरआइएस) लागू की गई है। हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों को यह दोनों सुविधाएं सरकार दे रही थी लेकिन अब केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि अतिरिक्त वेतन के तौर पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 1 जुलाई से नहीं दी जाएगी।

अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कई इसरो वैज्ञानिकों ने सरकार के निर्णय पर निराशा जताई। उदाहरण के तौर पर डी श्रेणी के एक वैज्ञानिक को लगभग 4 हजार रुपए प्रति माह प्रोत्साहन राशि के साथ महंगाई भत्ता आदि जोड़कर लगभग साढ़े ६ हजार रुपए मिलते थे जो अब नहीं मिलेंगे। इसरो के एक वैज्ञानिक ने कहा कि दिन-रात मेहनत कर इसरो के हर मिशन में सौ फीसदी सफलता सुनिश्चित करने के बावजूद सरकार का यह निर्णय मनोबल तोडऩे वाला है।

गौरतलब है कि हाल के कुछ वर्षों में इसरो ने देश के अन्य संस्थानों की तुलना में कहीं अधिक तरक्की की है और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल की है। इसरो की उपलब्धियों से न सिर्फ देश गर्वान्वित हुआ है बल्कि विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण कर कमाई भी की है।

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