तो अध्यादेश लाएगी केंद्र सरकार : पासवान

तो अध्यादेश लाएगी केंद्र सरकार : पासवान
केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान

Sanjay Kumar Kareer | Publish: May, 09 2018 06:41:46 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव का मामला : केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है अपना रुख

बेंगलूरु. केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने उम्मीद जताई कि उच्चतम न्यायालय अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून को हल्का नहीं करेगा। केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए अध्यादेश लाएगा कि कानून में कोई बदलाव नहीं हो।

उन्होंने यहां मंगलवार को कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार ने महा अभियोजक वेणुगोपाल के जरिये अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अजा-जजा सांसदों ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस संबंध में अपनी चिंताएं बताई थीं, तब प्रधानमंत्री ने उन्हें कानून से छेड़छाड़ नहीं होने देने का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती जिम्मेदार है क्योंकि उनके ही कार्यकाल में वर्ष 2007 में दो अध्यादेश जारी किए गए थे।

उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का मामला पिछले कई वर्ष से लंबित है। शीर्ष अदालत से इसे असंवैधौनिक नहीं माना है। अदालत ने पदोन्नति के तीन मानदंड बनाए हैं। उन पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आरक्षण संवैधानिक है तो पदोन्नति में आरक्षण से अजा-जजा समुदाय को वंचित नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने तीन बार आवश्यक संशोधन किए थे। शीर्ष अदालत के पदोन्नति में आरक्षण पर स्थगनादेश को हटाने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति का गठन किया गया है इस समिति में वे भी शामिल हैं।

सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता के बीच जंग : खरगे

कलबुर्गी. विधानसभा के चुनाव परिणाम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर चलने वाली भाजपा को करारा झटका लगेगा। राज्य की जनता कभी भी संघ की ओछी एवं सांप्रदायिक विचारधारा को मान्यता नहीं देगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने यह बात कही।

उन्होंने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक के चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन चुनाव परिणाम से देश की राजनीति भी प्रभावित होगी। यह चुनाव केवल सरकार बदलने के लिए नहीं है बल्कि यह सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की जंग है। कर्नाटक के विवेकी मतदाताओं ने कभी भी सांप्रदायिक ताकतों का समर्थन नहीं किया है। लिहाजा इस चुनाव में सांप्रदायिक भाजपाकी हार सुनिश्चित है। भाजपा के प्रशासन में अल्पसंख्यक, दलित तथा पिछड़े वर्ग के लोग कभी सुरक्षित नहीं हो सकते।

हाल में भाजपा के नेता सत्ता हासिल करने के एकमात्र लक्ष्य को लेकर दलित तथा पिछड़ों के हितों की बाते कर रहे हैं। लेकिन इस वर्ग को पता है कि भाजपा कभी भी उनके हितों की रक्षा नहीं कर सकती। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा ने हमेशा समाज के संपन्न तथा सांप्रदायिक मानसिकता वाले लोगों का ही साथ निभाया है। अजा-जजा समुदाय के अधिकार छीनने के लिए संघ के इशारे पर ही भाजपा के नेता कई बार संविधान बदलने का मुद्दा उठा रहे हैं।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned