चलते रहने में ही जीवन का आनंद: डॉ. समकित मुनि

शूले स्थानक में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 14 Sep 2020, 07:46 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में विराजित श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि के सान्निध्य में प्रवचन माला का आयोजन हुआ। इसके बाद अखिल भारतीय स्तर पर चल रही खुली किताब प्रतियोगिता के परिणाम घोषित हुए। लोगस्स पाठ पर प्रवचन देते हुए मुनि ने तीर्थंकरों को सूर्य की उपमा से सुशोभित किया। कहा कि जहां सूर्य गतिमान है वहां धर्म है।

सूर्य की एक विशेषता यह है कि वह सदा गतिमान रहता है। सूर्य हमेशा चलता रहता है वह न तो रुकता है न ही थकता है। मुनि ने कहा कि जीवन का आनंद चलने में है। जब तक सामथ्र्य है चलते रहो। पानी एक स्थान पर एकत्र होकर सड़ जाता है जिससे बीमारी के मच्छर पैदा होते हैं। बहता पानी निर्मल और स्वच्छ रहता है। जीवन में परेशानियां आएगी परंतु कभी भी थक कर हार मानकर मत बैठो।

मुनि के सान्निध्य में समकित की यात्रा "वे टू लीव" पुस्तक पर आधारित खुली किताब प्रतियोगिता के परिणाम के अंतर्गत प्रथम स्थान नासिक (महाराष्ट्र) एवं चेन्नई ने प्राप्त किया। द्वितीय विजेता मलरकोटला पंजाब, जामनेर एवं नासिक के रहे। तृतीय स्थान मेरठ, अमलोह एवं मैसूर के प्रतियोगियों को मिला। इस मौके पर बेंगलूरु के उपनगर एवं मैसूर से भी श्रद्धालु पधारे। प्रचार प्रसार मंत्री प्रेम कुमार कोठारी ने अपना उद्बोधन दिया। संचालन संघ मंत्री मनोहरलाल बंब ने किया।

Santosh kumar Pandey Desk
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