Karnataka : केआर पुरम विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को गढ़ बचाने की चुनौती

भाजपा को नया इतिहास बनाने की उम्मीद

बेंगलूरु. पिछले कई दशक से कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा केआर पुरम विधानसभा क्षेत्र बेंगलूरु के उन इलाकों में शामिल है जहां शहर का आकार तेजी से फैला लेकिन ढांचागत विकास की रफ्तार मंथर रही। पिछले छह चुनावों से कांग्रेस उम्मीदवार यहां जीतते आए हैं जिसमें 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव बैरती बसवराज क्रमश: 24 हजार और 33 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

हालांकि इस बार स्थिति अलग हो गई है। अब बसवराज भाजपाई हो गए हैं और उनके समर्थन में कई बीबीएमपी में निर्वाचित कांग्रेसी पार्षद भी उतर आए हैं। इसी कारण कांग्रेस को अपने चार पार्षदों को निष्कासित करना पड़ा, जबकि शेष छह भाजपा पार्षद हैं। पिछले चुनावों में भाजपा यहां मजबूती से कांग्रेस के खिलाफ लड़ती रही है लेकिन जीत हमेशा कांग्रेस को मिली। अब अगर बसवराज के सहारे भाजपा नया इतिहास बनाए तो यह बसवराज का करिश्मा ही कहा जाएगा।

केआर पुरम विधानसभा क्षेत्र 4.81 लाख मतदाताओं के साथ राज्य के कुछ बड़े निर्वाचन क्षेत्रों में एक है। हालांकि शहर का पुराना इलाका होने के कारण कई बार जातीय आधार पर भी राजनीतिक दलों ने यहां चुनाव लड़ा है क्योंकि वोक्कालिगा मतदाता हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे हैं। जद-एस ने इसी कारण सी कृष्णमूर्ति को उतारा है जो वोक्कालिगा हैं। हालंाकि मुख्य मुकाबले में कांग्रेस और भाजपा ही टिके दिख रहे हैं।

विधान परिषद सदस्य और कांग्रेस उम्मीदवार एम. नारायणस्वामी के लिए बसवराज से कड़ी चुनौती झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र में नया चेहरा होने और कांग्रेस के अंदरुनी संगठन में मचे हलचल का असर नारायणस्वामी के चुनाव पर भी दिख रहा है। हालांकि कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि परंपरागत कांग्रेस मतदाता इस बार भी नारायणस्वामी के पक्ष में रहेंगे और बसवराज को दल बदल के कारण सबक सिखाएंगे।

हालांकि, उम्मीदवारों की जीत हार में सबसे महत्वपूर्ण मतदान प्रतिशत रहेगा। 2018 में यहां 50 प्रतिशत से कुछ ज्यादा मतदान हुआ था जबकि 2013 में भी यही स्थिति थी। अगर मतदाताओं ने उपचुनाव को गंभीरता से नहीं लिया और वे मतदान के प्रति गंभीर नहीं रहे तो इस बार मतदान प्रतिशत और कम होगा जिससे उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ेगी। विशेषकर भाजपा को यह ज्यादा परेशान करेगा क्योंकि भाजपा का कोर वोट बैंक मध्यम वर्ग को माना जाता है जबकि शहरी मध्यम वर्ग मतदान में उत्साह नहीं दिखाता है। वहीं मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग सडक़, पेयजल, ट्रैफिक और अनियोजित विकास को सुदृढ करने की अपेक्षा पाल रखा है।

Priyadarshan Sharma
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