Chandrayaan-2: 19 जुलाई को लांचिंग संभव

Chandrayaan-2: 19 जुलाई को लांचिंग संभव

Rajendra Shekhar Vyas | Updated: 15 Jul 2019, 11:02:47 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • प्रक्षेपण से एक घंटे पहले जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन के वाल्व में नोटिस की गई तकनीकी खामी
  • एक वॉल्व की खराबी के कारण ही तरल ईंधन का रिसाव हुआ
  • पता चलते ही उलटी गिनती की प्रक्रिया रोक दी गई और बाद में प्रक्षेपण टाल दिया गया
  • अब चार दिन में पूरी हो जाएंगी तैयारियां

राजीव मिश्रा
बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब 19 जुलाई को CHANDRAYAAN-2 का प्रक्षेपण कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक अगर सबकुछ ठीक रहा तो मिशन 19 जुलाई को ही launch किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक सोमवार शाम इसरो प्रबंधन एवं उच्च अधिकारियों की हुई बैठक में यह फैसला किया गया।
इससे पहले सोमवार तड़के आखिरी घंटे में चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण तकनीकी विसंगति के कारण टाल दिया गया। इसरो ने कहा कि 'प्रक्षेपण से एक घंटे पहले प्रक्षेपण यान प्रणाली में Technical खामी पाई गई। एहतियाती कदम उठाते हुए चंद्रयान-2 का Launching टाल दिया गया है।'

दरअसल, रविवार सुबह 6 :51 बजे शुरू हुई Countdown सुचारू रूप से चल रही थी लेकिन प्रक्षेपण में जब लगभग 56 मिनट 24 सेकंड का समय शेष था तभी तकनीकी खामी का पता चला। इसके बाद उलटी गिनती की प्रक्रिया रोक दी गई और बाद में प्रक्षेपण टाल दिया गया। प्रक्षेपण सुबह 2:51 बजे होना था।
रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में हुआ रिसाव
इस बीच इसरो के सूत्रों के मुताबिक यह तकनीकी खामी GSLV Mark-3 रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में नोटिस की गई। cryogenic engine के Liquid fuel में रिसाव होने लगा था। कई बार इस रिसाव का पता चल जाता है लेकिन कई बार यह मालूम नहीं हो पाता है। समय रहते इसकी जानकारी होते ही मिशन को अंतिम समय में टाल दिया गया। इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर मिशन फिर भी लॉन्च होता तो उसके विफल होने की आशंका थी। अगर सफल हो भी जाता तो चंद्रयान-2 को जिस कक्षा में पहुंचाना था उस कक्षा में नहीं पहुंच पाता। इसरो चंद्रयान-2 को 170 गुणा 40 हजार 400 किमी वाली कक्षा में स्थापित करना चाहता था। चंद्रयान यान का वजन भी 3.8 टन है। रिसाव की वजह से निर्वात में पूरा थ्रस्ट नहीं मिलता जिससे वांछित कक्षा तक चंद्रयान-2 को नहीं पहुंचाया जा सकता था।
तकनीकी खामी तुरंत करेंगे दूर
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि रॉकेट विज्ञानी इस तकनीकी खामी का पता लगा चुके हैं। जो विसंगति सामने आई है वह एक वॉल्व में है। एक वॉल्व की खराबी के कारण ही तरल ईंधन का रिसाव हुआ। इसे तुरंत ठीक कर लिए जाने की उम्मीद है। इस बीच श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड पर खड़े जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट के टैंक से तरल ईंधन निकाल लिया गया है। क्रायोजेनिक इंजन में बेहद ज्वलनशील तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन का इस्तेमाल प्रणोदक के तौर पर होता है। इसके अलावा रॉकेट के ऊपरी हिस्से से चंद्रयान-2 और क्रायोजेनिक इंजन को भी खोलकर अलग किया जा चुका है। रॉकेट विज्ञानी खामी को जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश में जुटे हैं।
क्या है क्रायोजेनिक इंजन
दरअसल, क्रायोजेनिक इंजन रॉकेट मोटर्स हैं जिनमें तरल ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। जमीन पर रॉकेट में भरे जाने वाले ठोस और तरल प्रणोदकों की तुलना में क्रायोजेनिक चरण तकनीकी रूप से काफी जटिल होता है। इसमें तरल ईंधन रखने के लिए इंजन को इस तरह से डिजाइन किया जाता है और ऐसे अवयवों का प्रयोग किया जाता है कि वह तापमान को अत्यंत कम रख सके अन्यथा सामान्य temperature पर यह तरल ईंधन गैस में रूपांतरित हो जाएगा। आमतौर पर इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का प्रयोग होता है। ऑक्सीजन को तरल रूप में रखने के लिए उसे -28 3 डिग्री सेल्सियस और हाइड्रोजन को -253 डिग्री सेल्सियस पर रखना पड़ता है। क्रायोजेनिक इंजन रॉकेट के उपरी हिस्से में होता है। इसी क्रायोजेनिक इंजन में Liquid Fuel का रिसाव हुआ।

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