चित्रदुर्गा में होगा चंद्रयान-2 के लैंडर एवं रोवर का परीक्षण

चित्रदुर्गा में होगा चंद्रयान-2 के लैंडर एवं रोवर का परीक्षण
bangalore news

Shankar Sharma | Updated: 09 Oct 2016, 11:17:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

दूसरे चंद्र मिशन तैयारियों में जुटा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही चंद्रयान-2 के साथ भेजे जाने वाले दो अहम उपकरणों 'लैंडर' एवं 'रोवर' का परीक्षण करेगा

बेंगलूरु. दूसरे चंद्र मिशन तैयारियों में जुटा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही चंद्रयान-2 के साथ भेजे जाने वाले दो अहम उपकरणों 'लैंडर' एवं 'रोवर' का परीक्षण करेगा। यह परीक्षण चित्रदुर्गा के साइंस सिटी में किया जाएगा।

चंद्रमा की सतह से मिलती-जुलती जगह
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार लैंडर और रोवर को चित्रदुर्गा स्थित साइंस सिटी में एक छोटे विमान से उस जगह गिराया जाएगा जहां कि सतह चंद्रमा की सतह से मिलती-जुलती है। दरअसल, चंद्रमा की सतह क्रेटरों से भरी है और लैंडर को स्वचालित प्रणालियों के जरिए समतल सतह का अनुमान लगाकर स्वत: उतरना है।

परीक्षण के दौरान यह परखा जाएगा कि क्या लैंडर क्रेटरों से बचते हुए समतल सतह की पहचान कर पाता है। चंद्रमा पर एक किलोमीटर क्षेत्रफल वाले 1.8   लाख क्रेटरों की पहचान की गई है। मिशन की जटिलता को देखते हुए इसरो इस उपकरण का परीक्षण करेगा जिसकी सफलता चांद सहित मंगल पर उतरने का मार्ग प्रशस्त करेगी। इसके लिए लैंडर में सेंसर एवं स्वचालित प्रणालियां लगाई गई हैं।

इसरो के एक शीर्ष वैज्ञानिक ने इस बारे में बताया कि यह पहली बार है जब किसी आकाशीय पिंड पर उतरने की कोशिश की जा रही है। इसलिए गणना एवं तकनीक में मामूली चूक की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसके लिए तैयारियों में कदम-कदम पर सावधानी बरती जा रही है और यह परीक्षण उसी की एक कड़ी होगी।

जीएसएलवी मार्क-2 से होगा प्रक्षेपण
इसरो वर्ष 2018 की पहली तिमाही में चंद्रयान-2 परियोजना को अंजाम देने के लिए तैयार है। यह पूरी तरह स्वदेशी मिशन होगा।

इस अभियान में चंद्रमा की कक्षा में एक आर्बिटर स्थापित किए जाने के साथ ही लैंडर और रोवर भी भेजे जाएंगे, जो चांद की धरती पर उतरकर कई प्रयोगों को अंजाम देंगे। पूर्व योजना के मुताबिक मिशन के लिए लैंडर का निर्माण रूस को करना था मगर बदली हुई परिस्थितियों में इसरो ने खुद स्वदेशी तकनीक से लैंडर और रोवर तैयार की है। लगभग 3280 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 के सभी सभी पे-लोड इसरो ही तैयार करेगा। इसे जीएसएलवी मार्क-2 रॉकेट से छोड़े जाने की योजना है।

पहले चंद्र मिशन में चंद्रयान-1 का पे-लोड मून इमपेक्ट प्रोब (एमआईपी) उपग्रह से निकलकर चांद की धरती से जा टकराया था और उसी दौरान चांद पर पानी की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। इस बार चंद्रयान-2 से लैंडर निकलकर चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

लैंडर के चांद की धरती पर उतरने के बाद उससे रोवर निकलेगा, जो अगले 14 दिनों तक चांद की धरती पर चहलकदमी करेगा। यह एक खिलौना कार की तरह होगा जिसमें एल्युमीनियम के बने छह पहिए होंगे। रोवर चांद की धरती पर 2 सेमी प्रति सेकेंड की चाल से चलते हुए उसकी मिट्टी में मौजूद रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करेगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे चांद के कई अनसुलझे रहस्य सामनेे आएंगे।
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