script'Chickpet' is like mini India | लघु भारत जैसा है ‘चिकपेट’ | Patrika News

लघु भारत जैसा है ‘चिकपेट’

52 बाजार व 500 से अधिक गलियों का है कुनबा
बेंगलूरु के निर्माता कैम्पेगौड़ा ने बसाया था

बैंगलोर

Published: April 04, 2022 08:07:49 am

योगेश शर्मा
बेंंगलूरु. शहर का प्रमुख व्यावसायिक केन्द्र चिकपेट लघु भारत जैसा है। चिकपेट कैम्पेगौड़ा काल का है। 525 वर्ष पूर्व मागड़ी से आए कैम्पेगौड़ा ने चिकपेट व्यावसायिक क्षेत्र बसाया था। उस समय 52 पेटे जिन्हें मोहल्ला कहते हैं बसाए थे। हर पेटे की अपनी अलग विशेषता थी। चिकपेट क्षेत्र में वर्तमान में 52 बाजार, सौ से अधिक लेन व 500 से अधिक गलियां व लेन हैं। चिकपेट क्षेत्र में हर जाति, धर्म, वर्ग समुदाय के साथ हर प्रदेश का व्यापारी यहां मिल जाएगा। इसलिए इसे मिनी इंडिया के नाम से जाना जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। वर्तमान में चिकपेटे क्षेत्र में प्रतिदिन सात से आठ लाख से अधिक व्यापारी रोजाना खरीदारी व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आते हैं। चिकपेट क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ से दो सौ होटल व छोटे-बड़े दो सौ से अधिक लॉज हैं। इनमें जैन धर्मशाला भी शामिल हैं।
जानकारों की मानें तो बलेपेट, संतुसापेट, अक्कीपेट,कॉटनपेट, मामूलपेट, तरगुपेट, मनवरथपेट, सुल्तानपेट, कब्बनपेट सहित 52 पेट बनाए थे। हर पेट की एक विशेषता थी जैसे बलेपेट कंगन चूडिय़ों के लिए जाना जाता था। अक्कीपेट चावल के लिए, कॉटन पेट रुई के लिए, सुल्तानपेट रंगरोगन के लिए, संतुसा पेट संतों के लिए, मामूलपेट मतलब आढ़त का व्यापार क्षेत्र, तरगुपेट केवल थोक खाद्य सामग्री के लिए, कुम्बारपेट मटका, सुराही या मिट्टी के बर्तनों के लिए सहित अनेक पेट शामिल हैं।
लघु भारत जैसा है ‘चिकपेट’
लघु भारत जैसा है ‘चिकपेट’
लघु भारत जैसा है ‘चिकपेट’इस संबंध में चिकपेट क्षेत्र के भाजपा नेता ए.एल. शिवकुमार प्रसाद बताते हैं कि वर्ष 1958 में यहां केवल मकान ही थे। कोई दुकान नहीं थी। पूरे क्षेत्र में अधिकतम एक मंजिला मकान हुआ करते थे। अधिकांश मकान ग्राउंउ फ्लोर के ही थे। चार या पांच मंजिला एक भी मकान नहीं था। गत 50 वर्ष में मकान, दुकान व व्यावसायिक कॉम्पलेक्स में परिवर्तित हो चुके हैं। वे बताते हैं कि पहले चिकपेट क्षेत्र में वंशज, लिंगायत, गौड़ा, कुरबा या फिर कुछ जैन परिवार आकर यहां रहने लगे थे। कब्बनपेट, किलारी रोड, बलेपेट, आरटी स्ट्रीट, वीवर्स ही रहते थे। इसके बाद धीरे-धीरे स्वर्ण आभूषण निर्माण करने वाले राजस्थानी प्रवासी यहां आए और अपना कारोबार शुरू किया। इसके बार महाराष्ट्र से मराठियों का आगमन हुआ। इन लोगों ने यहां सोने व चांदी के जेवरों पर पॉलिशिंग के साथ स्वर्ण व रजत धातु रिफाइंड करने का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे वैश्य वर्ग का आगमन हुआ जिन्होंनेे कपड़ा के साथ अन्य व्यवसाय भी शुरू किया। सर्वाधिक जैन समुदाय के लोग ज्यादा आए। करीब 20 से 25 वर्ष पूर्व चिकपेट क्षेत्र में 6 से 7 हजार मतदाता थे। चिकपेट क्षेत्र के पूरी तरह से व्यावसायिक क्षेत्र बन जाने के बाद सभी मकान दुकान व व्यावसायिक कॉम्पलेक्स में तब्दील हो गए हैं। पूरे चिकपेट क्षेत्र में ग्राउंड फ्लोर पर एक प्रतिशत से भी कम मकान मिलेंगे। मकान यदि हैं तो वे कॉम्पलेक्स के पांचवे फ्लोर पर ही मिलेंगे। इसके चलते जैन मतदाता भी घटकर 1000 के करीब ही रह गए हैं। ऐसा नहीं है कि जैन समुदाय ने चिकपेट क्षेत्र से अपने घर या दुकान बेच दी हो। लक्ष्मी की कृपा के चलते अधिकांश जैन परिवार धनी हो गए हैं और उन्होंने अपने मकान दूसरी नई कॉलोनियों में बनवा लिए हैं। वर्तमान में राजपुरोहित समाज, राजपूत समाज, चौधरी समाज, कुमावत समाज, माली समाज, प्रजापत समाज, श्रीमाली समाज बहुत लोग अभी यहां पर हैं। अभी राजस्थानी प्रवासी व स्थानीय मतदाता बराबर अनुपात में हैं। अभी भी यहां सभी समुदायों के 32 से 35 हजार मतदाता हैं।
Al shivkumarसुई से लेकर प्लेटिनम का थोक कारोबार केन्द्र
चिकपेट में यहां सुई से लेकर प्लेटिनम तक का होलसेल व्यापार चिकपेट में हो रहा है। सिटी स्ट्रीट व नगरथेपेट मेें प्रतिदिन करीब तीन सौ से चार सौ करोड़ का व्यापार होता है। चिकपेट क्षेत्र में कपड़ा, इलेक्ट्रिकल, प्लाइवुड मार्केट, प्लास्टिक का मार्केट के साथ सभी बाजार यहां हैं। सिल्क की बेंगलूरु बहुत बड़ी मंडी है। सिल्क का व्यापार भी बेंगलूरु से शुरू होता है। मनवरथपेट में तो चप्पल का भी होलसेल बाजार है। शिवकुमार कहते हैं कि प्रतिदिन चिकपेट क्षेत्र में सात से आठ लाख लोग व्यापार के सिलसिले में चिकपेट आते हैं। सर्वाधिक लोग यहां तमिलनाडु, आन्ध्रा, महाराष्ट्र से आते हैं। बेंगलूरु में आकर फालतू बैठने वाले बहुत कम लोग हैं। सभी अपना-अपना व्यवसाय कर रहे हैं।
चिकपेट पुलिस स्टेशन किया बंद
कानून व्यवस्था के लिहाज से पहले चिकपेट पुलिस स्टेशन हुआ करता था। जिसे पांच वर्ष पूर्व बंद कर दिया गया। अब चिकपेट पुलिस स्टेशन के कुछ हिस्से को उप्पारपेट व कुछ को कॉटनपेट व कुछ को सिटी मार्केट पुलिस स्टेशन में शामिल कर दिया है। शिवकुमार बताते हैं 1925 से चिकपेट पुलिस स्टेशन था। इसके साथ ही राजस्व विभाग भी हुआ करता था। पांच वर्ष पूर्व सरकार ने इसे बंद कर दिया। चिकपेट पुलिस स्टेशन ऐतिहासिक था। क्षेत्र के लोगों ने काफी विरोध भी किया था।
महापुरुषों के नाम से हैं लेन
चिकपेट क्षेत्र में सौ से अधिक लेन हैं। वीएस लेन, ईएस लेन, एसवी लेन, डीएस लेन, डीके लेन, संजीवप्पा लेन, बसट्टीपेट, जेएमलेन, केवी लेन सहित अनेक लेन हैं।

ऐतिहासक मंदिरों का है खजाना
चिकपेट क्षेत्र में हर गली में एक मंदिर जरूर मिल जाएगा। यहां धार्मिक लोग हैं। शिव मंदिर सहित सभी मंदिरों में प्रवासी पूरा सहयोग कर रहे हैं। चिकिपेट क्षेत्र में 500 वर्ष से प्राचीन करीब एक दर्जन मंदिर मिल जाएंगे। मंदिरों का इतिहास किसी से अछूता नहीं है। काशी विश्वनाथ के भी दर्शन बलेपेट क्षेत्र में हो जाएंगे।
इनका कहना है
चिकपेट क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र होने के साथ धर्म व श्रद्धा का भी प्रमुख केन्द्र है। यहां सतानत संस्कृति के साथ जैनों के प्राचीन मंदिर भी हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र सभी संस्कृतियों के संजोए हुए हैं।
लीला शिवकुमार,
निवर्तमान पार्षद
leela shiv kumar

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