सिद्धरामय्या सरकार ने दिया स्वच्छ प्रशासन : चिदंबरम

सिद्धरामय्या सरकार ने दिया स्वच्छ प्रशासन : चिदंबरम

Sanjay Kumar Kareer | Publish: May, 10 2018 01:35:22 AM (IST) Mangalore, Karnataka, India

संघ परिवार तथा भाजपा देश की संघीय व्यवस्था को तहस-नहस करना चाहता है।

मेंगलूरु. सिद्धरामय्या सरकार ने पांच वर्ष में राज्य की जनता को स्वच्छ, संवेदनशील तथा विकासोन्मुख प्रशासन दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम ने यह बात कही।

यहां बुधवार को उन्होंने राज्य सरकार की उलब्धियां गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में कर्नाटक का राज्य समग्र सकल घरेलू उत्पाद के विकास की दर 8 फीसदी थी। इस कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013-14 में राज्य का राजस्व 643,292 करोड़ रुपए तो वर्ष 2013-14 में 949,111 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय 125 फीसदी वृद्धि के साथ 77,309 रुपए से बढ़कर 174,551 रुपए तक पहुंच गई है। साथ में राज्य में बेरोजगारी न्यूनतम 2.6 फीसदी है। जो देश में 5.9 फीसदी तथा गुजरात में 5 फीसदी की तुलना में काफी कम है। पांच वर्षों के दौरान कर्नाटक सरकार के पास अपेक्षा से अधिक राजस्व संग्रहण हुआ है। इस मामले में कर्नाटक पूरे देश में अव्वल रहा है। इस दौरान मुद्रा स्फीति केवल 2.26 फीसदी रही है।

उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक आरएसएस तथा भाजपा के नापाक इरादों को विफल करने के लिए राज्य की जनता को कांग्रेस को जिताना होगा। संघ परिवार तथा भाजपा एक राष्ट्र एक धर्म, एक संस्कृति, एक राष्ट्र एक इतिहास एक राष्ट्र एक संहिता जैसे संकीर्ण नारों के माध्यम से देश की संघीय व्यवस्था को तहस-नहस करना चाहता है।


उन्होंने कहा कि राज्य की जनता भूली नहीं है कि वर्ष 2008 से 2013 तक तत्कालीन भाजपा सरकार ने 110 विधायकों के साथ कैसा गैरजिम्मेदाराना शासन किया था। 5 वर्ष के कार्यकाल में भाजपा में अंतर्कलह के चलते तीन मुख्यमंत्रियों ने सरकार चलाई थी। भाजपा के यह तीनों पूर्व मुख्यमंत्री आज भी चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं। जिनके पास भाजपा सरकार की उपलब्धी के रुप मे कहने के लिए कुछ भी नहीं है।


उन्होंने कहा कि संघ तथा भाजपा की 15 वें वित्त आयोग को लेकर कई अतार्किक धारणाएं देश की संघीय व्यवस्था के विपरीत हैं। इससे राज्य सरकारों के साथ अन्याय होगा और ये राज्यों के लिए काफी नुकसानदायी साबित होगी। केंद्र सरकार के राज्यों को अनुदान आवंटन के नए मानदंड से कर्नाटक जैसे विकसित तथा अधिक राजस्व संग्रह करने वाले राज्यों का अधिक नुकसान होगा। इससे राज्यों को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान में काफी कटौती होगी।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned