सीएम की दो टूक: जो भाव कहा था, उसी के मुताबिक करें किसानों को बकाया भुगतान

सीएम की दो टूक: जो भाव कहा था, उसी के मुताबिक करें किसानों को बकाया भुगतान

Rajendra Shekhar Vyas | Updated: 23 Nov 2018, 10:28:06 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

चीनी मिल मालिकों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक

एफआरपी से अधिक कीमत पर नहीं टूटा गतिरोध, चीनी मिल मालिकों ने मांगा वक्त
अधिवेशन से पहले समस्या हल करें
बेंगलूरु. राज्य सरकार और चीनी मिल मालिकोंं के बीच गन्ना उत्पादक किसानों के बकाया भुगतान और चालू पेराई सत्र में केंद्र सरकार की ओर से तय निष्पक्ष और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) से अधिक कीमत के भुगतान के मसले पर गतिरोध खत्म नहीं हो पाया। एफआरपी से अधिक भुगतान के मसले पर चीनी मिल मालिकों ने अधिक वक्त की मांग कर ली जिसके कारण बैठक अधूरी रही। हालांकि, सरकार ने चीनी मिल मालिकों को किसानों को आपूर्ति के वक्त जो भाव कहा था उसी के मुताबिक एक पखवाड़े में बकाया का भुगतान करने के निर्देश दिए।
बेलगावी और उत्तर कर्नाटक में पिछले साल के बकाया भुगतान की मांग को लेकर चीनी मिल मालिकों के खिलाफ किसानों के आंदोलन तेज होने के बाद मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने गुरुवार को चीनी मिल मालिकों के साथ दूसरे दौर की बैठक की।
कुमारस्वामी ने बेलगावी व बागलकोट जिलों के चीनी मिल मालिकों को अनुबंध की दर के आधार पर गन्ना किसानों को बकाया राशि का भुगतान करने और बेलगावी में 10 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानमंडल अधिवेशन से पहले परस्पर बातचीत कर इस समस्या को सुलझाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि चीनी मिल मालिक व्यवसाय में आने वाले उतार- चढ़ाव को झेेलने में सक्षम होते हैं लेकिन किसानों में अपनी उपज का सही मोल नहीं मिलने पर नुकसान झेलने की सामथ्र्य नहीं है। लिहाजा चीनी मिल मालिकों ने केन्द्र सरकार द्वारा तय एफआरपी दर से अधिक जिन दरों पर किसानों से गन्ना खरीदने के अनुबंध किए हैं, उसके आधार पर भुुगतान करना ही होगा।
चर्चा के बाद अंतत: बागलकोट जिले के चीनी मिल मालिक किसानों को कटाई व परिवहन के 650 रुपए छोड़कर 2,250 रुपए प्रति टन के हिसाब से भुगतान करने पर सहमत हो गए। बेलगावी जिले में अधिकतर कारखाने एफआरपी दरों से अधिक दर पर भुगतान कर चुके हैं। शेष 9 कारखानों के मालिकों ने भी एफआरपी से अधिक मूल्य तो चुकाया है लेकिन तय हुई दर के हिसाब से भुगतान करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि वे किसानों के साथ चर्चा कर परस्पर सहमति से मसला हल कर लेंगे।
मुख्यमंत्री ने इस सीजन में गन्ने की पेराई शुरू करने से पहले चीनी मिल मालिकों को किसानों के साथ कानूनी तौर पर अनुबंध करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने चीनी मिल मालिकों कों चेताया कि भविष्य में इस तरह की कोई उलझन पैदा नहीं होने दें। इससे पहले मंगलवार को भी इस मसले पर अधिकारियों, किसानों और चीनी मिल मालिकों के प्रतिनिधियों के साथ करीब छह घंटे तक बैठक की थी लेकिन उस बैठक में अधिकांश चीनी मिल मालिक नेता अनुपस्थित रहे थे। सबने अपने प्रतिनिधियों को भेजा था। इसके बाद सरकार ने बेलगावी और बागलकोट जिले के चीनी मिल मालिकों की बैठक बुलाई थी। इस बार बैठक में कांगे्रस और भाजपा से वे सभी नेताओं ने भाग लिया जो चीनी मिलों से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री के साथ बैठक से पहले चीनी मिल मालिकों ने एक होटल में बैठक की और हालात पर ्रचर्चा की। बैठक में उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, बेलगावी जिला प्रभारी मंत्री रमेश जारकीहोल्ली(कांग्रेस), बागलकोट जिला प्रभारी मंत्री शिवानंद पाटिल, सहकारिता मंत्री बंडप्पा काशमपुर, मुख्य सचिव टी. एम. विजय भास्कर के अलावा विभिन्न विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में कांग्रेस के पूर्व मंत्री एस. आर. पाटिल, सतीश जारकीहोली, विधायक आनंद न्यामगौड़ा, भाजपा के पूर्व मंत्री मुरुगेश आर निराणी, बालचंद्र जारकीहोली, उमेश कत्ती के अलावा दक्षिण भारत चीनी मिल मालिक महासंघ के अध्यक्ष के अलावा 31 चीनी मिल मालिकों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बालचंद्र जारकीहोली ने कहा कि मामले को सुलझाने में अभी १५ दिन का वक्त लगेगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने चीनी मिल मालिकों से वर्ष २०१८-१९ के लिए एफआरपी से ३०० रुपए प्रति टन का अधिक भुगतान करने के लिए कहा। इस पर मिल मालिकों ने कहा कि वे वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। वर्ष २०१८-१८ के लिए एफआरपी २५५० रुपए प्रति टन था जबकि वर्ष २०१८-१९ के लिए २७५० रुपए प्रति टन है। बालचंद्र ने कहा कि चीनी मिलों के इस वर्ष एफआरपी से अधिक का भुगतान करना संभव नहीं है क्योंकि पिछले साल के चीनी का भंडार भी पड़ा है।

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