scriptChildren cought between private and govt schools, parents upset | निजी और सरकारी स्कूल के बीच पीसते बच्चे, अभिभावक परेशान | Patrika News

निजी और सरकारी स्कूल के बीच पीसते बच्चे, अभिभावक परेशान

- फीस मिलने पर ही निजी स्कूल जारी करेंगे स्थानांतरण प्रमाणपत्र

बैंगलोर

Published: November 08, 2021 11:28:53 am

बेंगलूरु. कोरोना महामारी से उत्पन्न आर्थिक तंगी के कारण इस बार निजी स्कूलों के हजारों बच्चों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। लेकिन ज्यादातर ऐसे बच्चे पुस्तक, यूनिफॉर्म और मिड-डे-मील से वंचित हैं।

शैक्षणिक सत्र के बीच में स्कूल छोडऩे और फीस नहीं भरने के कारण निजी स्कूल प्रबंधनों ने स्थानांतरण प्रमाणपत्र जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने के बावजूद बच्चों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूल के ये बच्चे सरकारी सुविधाओं से वंचित हो गए हैं।

निजी और सरकारी स्कूल के बीच पीसते बच्चे, अभिभावक परेशान
निजी और सरकारी स्कूल के बीच पीसते बच्चे, अभिभावक परेशान

लोक शिक्षण विभाग (डीपीआइ) के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य भर में हजारों छात्रों को इसकी वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। बच्चों ने भले ही सरकारी स्कूलों में पढ़ाई शुरू कर दी है।

ये छात्र स्टूडेंट अचिभमेंट ट्रैकिंग सिस्टम (एसएएसटी) में निजी स्कूलों में नामांकित के रूप में सूचीबद्ध हैं और इसलिए पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म और मिड-डे-मील पाने में असमर्थ हैं।

एक सरकारी उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यपक ने बताया कि स्कूल में इस बार 20 नए विद्यार्थी भर्ती हुए हैं। सभी निजी स्कूलों से आए हैं। इनमें से 12 विद्यार्थियों के पास स्थानांतरण प्रमाणपत्र नहीं है। बच्चों को मिड-डे-मील से वंचित नहीं किया गया है। लेकिन यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें जारी करने में असमर्थ हैं क्योंकि ये छात्र स्कूल के तहत एसएटीएस डेटाबेस में नामांकित नहीं हैं।

एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम स्कूल्स इन कर्नाटक (केएएमएस) के महासचिव डी. शशिकुमार के अनुसार निजी स्कूल स्थानांतरण प्रमाणपत्र जारी नहीं कर रहे हैं क्योंकि कई अभिभावकों ने पिछले दो शैक्षणिक वर्षों से फीस का भुगतान नहीं किया है। कई लोगों ने ऑनलाइन कक्षाओं के लिए भी भुगतान करने से इनकार कर दिया है। यह घोर अन्याय है और अगर अभिभावकों ने भुगतान नहीं किया तो स्कूल प्रबंधन को भारी नुकसान होगा।

समस्या को स्वीकार करते हुए डीपीआइ के आयुक्त आर. विशाल ने कहा कि पूरे मामले पर उनकी नजर है। समाधान के प्रयास भी जारी हैं। यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों को मध्याह्न भोजन से वंचित न किया जाए।

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