मंदिरों के कपाट खुले मगर पहले जैसी चहलपहल नहीं

अभी तक पहले जैसी रौनक नदारद है।

By: Sanjay Kulkarni

Published: 17 Jun 2020, 10:15 AM IST

बेंगलूरु. शहर में अनलॉक १.० के दौरान मंदिरों के कपाट खुले लगभग एक सप्ताह बीत चुका है। लेकिन अभी तक पहले जैसी रौनक नदारद है। पहले सुबह-शाम मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें दिखती थीं, अब पूरे दिन में 25-50 श्रद्धालु ही आते हैं। मंदिरों के प्रबंधन राज्य सरकार के निर्देशों का यथावत पालन कर रहे हैं। सुबह-शाम दो-दो घंटे मंदिर खुलते हैं। थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर से हाथ साफ कराने के बाद ही प्रवेश दिया जाता है।

राजाजीनगर का राममंदिर सैकड़ों श्रध्दालुओं की श्रध्दास्थली है। इस मंदिर में सुबह 5.30 से दोपहर 12.30 तक फिर शाम को 5.30 बजे से रात 9 बजे तक सैकड़ों श्रध्दालुओं का तांता लगता था। लेकिन अब प्रशासनिक आदेश के तहत यह मंदिर सुबह 8.30 बजे से 10.30 तथा शाम को 6 बजे से 8.30 बजे तक ही खुलता है।मंदिर के प्रबंधन समिति के सदस्य के.श्रीधर के अनुसार लॉकडाउन के पहले इस मंदिर सुबह 250 तथा शाम को 350 से अधिक श्रध्दालु आते थे लेकिन अब सुबह से शाम तक २५-30 श्रध्दालु आते हैं। श्रध्दालु केवल भगवान का दर्शन कर सकते हैं। अन्य सभी सेवाओं पर रोक लगाई गई है। प्रति दिन सुबह मंदिर में 250 से 300 लोगों को प्रसाद का वितरण किया जाता था। लेकिन अब यह तीर्थप्रसाद सेवा बंद है। मंदिर के आस-पास फूल, अगरबत्ती, नारियल तथा पूजा की सामग्री की दुकानें बंद हैं।मंदिर में श्रध्दालूओं की संख्या कम होने के कारण पूजा सामग्री बेचनेवाले, मंदिर में फूलों की सजावट करनेवाले कई लोगों का कारोबार चौपट हो गया है।

राजाजीनगर के छठे ब्लॉक में स्थित वेंकटरमणस्वामी मंदिर में भी ऐसा ही सन्नाटा छाया हुआ है। लगभग ढाई एकड़ विस्तार में फैले इस मंदिर में जहां भगवान के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब यहां श्रध्दालुओं की संख्या काफी कम नजर आ रही है। मागड़ी रोड के टोलगेट के निकट स्थित शनिश्वर मंदिर में प्रति शनिवार को मेले जैसी भीड़ नजर आती थी लेकिन अब ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिल रहा है।विजयनगर के आदिचुंचनगिरी मठ के परिसर में स्थित कालभैरवेश्वर मंदिर में श्रध्दालुओं की संख्या न के बराबर है।

इस मंदिर के कुछ दूरी पर स्थित कन्यका परमेश्वरी मंदिर के प्रबंधक समिति के सदस्य सत्यनारायण शेट्टी के अनुसार अनलॉक के पश्चात मंदिर में पहले जैसे चहल-पहल नहीं है। प्रशासन के निर्देशों के तहत श्रध्दालूओं में सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य किया गया है। मंदिर में एक साथ केवल दस श्रध्दालुओं को प्रवेश दिया जाता है। मंदिर में 65 वर्ष से अधिक तथा छोटे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।जो श्रध्दालु नियमित रूप से मंदिर आते हंै केवल ऐसे गिने चुने श्रध्दालू दिख रहे हैं।विजयनगर के कोदंडरामस्वामी मंदिर तथा मारुति मंदिर में भी श्रध्दालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है।

सानेगुरूवनहल्ली के काशी विश्वनाथ मंदिर तथा साईबाबा मंदिर में भी श्रध्दालुओं की संख्या पहले जैसी नहीं है। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पूर्व पार्षद पद्मनाभ के अनुसार लॉकडाउन से पहले साई मंदिर में प्रति गुरुवार की आरती में 400 से 600 लोगों का जमावड़ा होता था। लेकिन अब यहा सााप्ताहिक आरती में 20-25 श्रध्दालू ही आ रहे हैं। श्रद्धालुओं के अभाव में इन दोनों मंदिरों के परिसर में पूजा सामग्री बेचनेवाली 50 फीसदी दुकानें बंद हो गई है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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