कावेरी मसले पर बोले सीएम,खलनायक नहीं पीडि़त है राज्य

कावेरी मसले पर बोले सीएम,खलनायक नहीं पीडि़त है राज्य
bangalore news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 03 2016 11:44:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने  कहा कि कावेरी मामले में राज्य को कुछ लोग राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर यह कहते हुए खलनायक के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह देश

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने  कहा कि कावेरी मामले में राज्य को कुछ लोग राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर यह कहते हुए खलनायक के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह देश की शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद पड़ोसी राज्य के लिए पानी नहीं छोड़ रहा है। सिद्धरामय्या ने कहा कि कर्नाटक इस मामले मेंं खलनायक नहीं बल्कि पीडि़त है।
 
महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर गांधी भवन में रविवार को आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद सिद्धरामय्या ने सुप्रीम कोर्ट का बार-बार पानी छोडऩे का आदेश देने का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीर्ष न्यायालय के आदेश के खिलाफ नहीं जाना चाहती और राज्य ने कावेरी बेसिन में जलसंकट के बावजूद तमिलनाडु के लिए बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा है। लेकिन तमिलनाडु के लिए छह दिनों तक रोजाना 6 हजार क्यूसेक पानी छोडऩे के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 30 सितम्बर को जारी ताजा आदेश मानना कठिन है।

संकट के बावजूद  छोड़ा पानी
उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की विफलता के बावजूद तमिलनाडु के लिए पहले ही 53 टीएमसी पानी छोड़ा है। तटीय राज्यों में उत्तर-पूर्वी मानसून से अच्छी बारिश हो रही है और वहां के जलाशयों  में अच्छा खासा पानी भरा है। लेकिन कर्नाटक मानसून की विफलता से पीडि़त है जो समाप्त हो चुका है और राज्य के कावेरी बेसिन में बारिश खत्म हो चुकी है।

सिद्धरामय्या ने दावा किया कि तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में बड़ी मात्रा में पानी का भंडार है और वहां पर उत्तर-पूर्व मानसून से भी अच्छी बारिश की उम्मीद है। तमिलनाडु को सांबा की फसल के लिए कर्नाटक से और पानी लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन वे नाहक दबाव डाल रहे हैं। कर्नाटक पहले ही लगातार दूसरे साल सूखे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के चारों कावेरी जलाशयों में उपलब्ध पानी मैसूरु, मंड्या के अलावा कावेरी बेसिन के गांवों व कस्बों के अलावा समूचे बेंगलूरु शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए ही पर्याप्त है। पेयजल पहली वरीयता है और सरकार पहले इसे पूरा करेगी। अगले साल जून तक पेयजल आपूर्ति के लिए पानी संरक्षित करना होगा।

कावेरी जल विवाद में कर्नाटक को खलनायक के तौर पर पेश करने पर पीड़ा व्यक्त करते हुए सिद्धरामय्या ने सवाल किया कि क्या मानसून की विफलता के कारण पेयजल संकट का सामना कर रहे राज्य को इस तरह पेश करना उचित है? उन्होंने कहा कि कर्नाटक के साथ विविध नदी जल विवादों में अन्याय ही हुआ है और कावेरी नदी के पानी में उसके अधिकारपूर्ण हिस्से को पाने के मामले में पिछली एक सदी यानी अंग्रेजी शासनकाल से अन्याय होता आ रहा है। इस विवाद को लोगों की भावनाओं के मुताबिक आज तक नहीं सुलझाया जा सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि  कर्नाटक ने कावेरी नदी व उसकी सहायक नदियों पर जलाशयों के निर्माण के लिए अपना कोष खर्च किया है लेकिन राज्य पर आज पानी छोडऩे के लिए दबाव डाला जा रहा है। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनादर नहीं कर रही बल्कि देश के संविधान व उसके चारों स्तंभों पर यकीन रखती है।


प्रस्ताव पर कायम रहे सरकार : शेट्टर
इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर ने कहा कि तमिलनाडु को कावेरी पानी नहीं छोडऩे के बारे में विधानमंडल में पारित किए गए सर्वसम्मत प्रस्ताव पर राज्य सरकार को कायम करना चाहिए। शेट्टर ने रविवार को हुब्बली में संवाददाताओं से कहा कि तमिलनाडु के लिए एक बूंद तक पानी नहीं छोडऩे के बारे मे शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में निर्णय किया गया है जिसके चलते इस प्रस्ताव पर कायम रहना अनिवार्य है। यह सच है कि सुप्रीम कोर्ट ने  पानी छोडऩे का निर्देश दिया है पर छोडऩे के लिए पानी कहां हैं? जब हमारे पास पीने के लिए ही पानी नहीं हो तो ऐसी स्थिति में पानी बाहर छोडऩा कैसे संभव हो सकता है।  इस मसले पर आगे चर्चा के लिए बुलाए गए विधानमंडल के अधिवेशन में भी पार्टी इस पर अटल रहेगी।

संभव नहीं पीएम का दखल : सदानंद
केंद्रीय सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने कहा कि कावेरी विवाद में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल की बार बार मांग करना उचित नहीं है। यह मसला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन होने की वजह से इसमें प्रधानमंत्री का दखल संभव नहीं है। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि  कावेरी मामले में केंद्र सरकार चुपचाप बैठी है। केंद्रीय जल-संसाधन मंत्री उमा भारती ने मध्यस्थता के लिए बैठक बुलाई लेकिन तमिलनाडु के हठी रवैये की वजह से बैठक सफल नहीं हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में तमाम जानकारी एकत्रित की है और देवेगौड़ा के साथ भी चर्चा की है। मसला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कुछ संवेदनशील मसलों को उजागर नहीं किया जा सकता।

नरीमन को बदलना राज्य सरकार पर निर्भर:जिगजिणगी
इस बीच केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता राज्य मंत्री रमेश जिगजिणगी ने कहा कि तमिलनाडु को कावेरी पानी नहीं छोडऩे के मसले पर भाजपा सरकार के साथ खड़ी है पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील फाली एस. नरीमन को बदलने के बारे में निर्णय सरकार पर छोड़ा जाता है। उन्होंने रविवार को भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में कहा कि सभी राजनीतिक दल कावेरी के मसले पर एकराय व एकजुट हैं और सरकार के निर्णय का समर्थन करते हैं। सभी सांसद राज्य भाजपा के निर्णय को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि नरीमन राज्य का पक्ष सशक्त तरीके से रखने में विफल रहे। इसी वजह से उन्हें हटाने पर चर्चा चल रही है पर यह मसला राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करता है।

भाजपा कावेरी प्रबंध बोर्ड के खिलाफ: सिम्हा
भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद प्रताप सिम्हा ने कहा कि भाजपा कावेरी प्रबंध बोर्ड के गठन का विरोध करती है। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष बी.एस. येड्डियूरप्पा, सदानंद गौड़ा, अनंत कुमार ने केंद्र सरकार को सूचित किया है। पार्टी की प्रदेश व राष्र्ट्रीय इकाई ने कावेरी मामले में राज्य के हितों की रक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की तरफ से पैरवी करने वाले नरीमन का राज्य की तरफ से पैरवी करने के बजाय पलायन करना  अनुचित है। तमिलनाडु को कावेरी पानी नहीं छोडऩे का राज्य सरकार का कदम उचित है और इस मामले में भाजपा सरकार के साथ है।
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