सीएम बोले, गरीबों का नि:शुल्क उपचार चिकित्सकों की जिम्मेदारी

सीएम बोले, गरीबों का नि:शुल्क उपचार चिकित्सकों की जिम्मेदारी

Shankar Sharma | Publish: Sep, 09 2018 09:39:50 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को सोसायटी ऑफ मिनिमली इन्वेसिव कार्डियोवैस्क्यूलर एंड थोरेसिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एसएमआइसीटीएसआइ) के तीसरे वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया।

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को सोसायटी ऑफ मिनिमली इन्वेसिव कार्डियोवैस्क्यूलर एंड थोरेसिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एसएमआइसीटीएसआइ) के तीसरे वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि जयदेव हृदय रोग संस्थान गरीब मरीजों के लिए काफी अच्छा काम कर रहा है। निजी अस्पताल व चिकित्सकों की भी जिम्मेदारी है कि वे किफायती दरों पर सर्वश्रेष्ठ उपचार उपलब्ध कराएं, गरीब मरीजों का नि:शुल्क उपचार करें।


मुख्यमंत्री ने कई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष १९६० में दो फीसदी के मुकाबले अब १२ फीसदी लोग हृदय की बीमारियों से ग्रसित हैं। ऐसे में वर्ष २०२० तक हृदयाघात सहित अन्य हृदय संबंधी बीमारियों के सबसे ज्यादा मरीज भारत में होंगे।


दिल की बीमारी हर परिवेश के लोगों में घर कर रही है। देश में करीब २५ फीसदी मौतें हृदय की बीमारियों के कारण हो रही हैं। हृदयाघात से मरने वाले लोगों में से एक-चौथाई की उम्र ४० वर्ष से कम है। आधुनिक जीवनशैली, मधुमेह और उच्च रक्तचाप हृदय की बीमारियों के मुख्य कारण हैं।


हृदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एन. मंजूनाथ, एसएमआइसीटीएसआइ के संस्थापक सदस्य डॉ. युगल मिश्रा और डॉ. विवेक जवली सहित कई हृदय रोग विशेषज्ञों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया।

सीबीसीएस विद्यार्थियों को राहत
बेंगलूरु. विश्वेश्वरय्या प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) ने विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) के तहत पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों को राहत दी है। तीसरे सेमेस्टर में जाने से पहले प्रथम सेमेस्टर व चौथे सेमेस्टर में जाने से पहले दूसरे सेमेस्टर के सभी विषयों में उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। सत्र २०१५ और सत्र २०१७ में दाखिल करीब ५००० विद्यार्थी इससे लाभान्वित होंगे।


वीटीयू के कुलसचिव (प्रशासन) प्रो. एच.एन. जगन्नाथ ने बताया कि नए नियमों के तहत एक से दूसरे सेमेस्टर में जाने के लिए चार से ज्यादा विषय लंबित नहीं होने चाहिए। इनमें सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों विषय शामिल हैं। फाइनल सेमेस्टर में प्रवेश के योग्य होने के लिए विद्यार्थियों को प्रथम सेमेस्टर के सभी विषयों को पास करना होगा। इसके अलावा चार से ज्यादा विषय लंबित नहीं होने चाहिए। गौरतलब है कि विद्यार्थी लंबे समय से इस नियम को समाप्त करने की मांग कर रहे थे।विभिन्न विद्यार्थी संगठनों के बैनर तले विद्यार्थियों ने कई बार प्रदर्शन भी किया था।

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