अनुशासन का अर्थ आज्ञा अनुसार चलना

अनुशासन का अर्थ आज्ञा अनुसार चलना

Ram Naresh Gautam | Publish: Oct, 13 2018 05:05:59 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 05:06:00 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

अनुशासन से जीवन का निर्माण और व्यवहार की निर्मलता प्रकट होती है

बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता के सान्निध्य में साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि अनुशासन का अर्थ आज्ञा अनुसार चलना है। किसी की आज्ञा में रहने से स्वतंत्रता भंग नहीं होती, अपितु आज्ञा में रहने से व्यक्ति योग्य बनता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में सर्वप्रथम अनुशासन में रहने की कला सिखाई जाती है। अनुशासन से जीवन का निर्माण और व्यवहार की निर्मलता प्रकट होती है।

साध्वी सौरभप्रज्ञा ने कहा कि ईमानदारी मानव जीवन की रक्षक है। अपने भगवान, आत्मा और समाज के प्रति वफादारी रखनी चाहिए। साध्वी अमितप्रज्ञा ने एकासन विधि संपन्न करवाई। लोगस्स आराधना के दूसरे दिन 350 श्रावकों ने भाग लिया। बाल संस्कार शिविर में बच्चों को ध्यान प्रक्रिया एवं बुद्धि विकास के कुछ गुर सिखाए गए। साध्वी संयमलता के नौ दिवसीय अखण्ड मौन साधना की पुर्णाहूति पर 18 अक्टूबर को महामांगलिक का आयोजन होगा।

 

शुभ कार्य में देर नहीं करें
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने प्रवचन में कहा कि समय में बहुत शक्ति है। इसे हम जादुई भी कह सकते हैं। जो पलभर में व्यक्ति को हीरो बना देता है और पल भर में जीरो बना देता है। जब समय सत्कार्यों में लग जाता है तो हमारे लिए अनमोल हीरा बना जाता है और हम उसके मालिक, मगर जब हम उसे सत्कार्यों में लगाने की बजाय दुष्कार्यों में लगा देते हैं तो वह दुष्ट देव बनकर हमें हमारे ही कृत्यों पर घोर कष्ट देता है। इसलिए शुभ कार्य को तो शीघ्र कर डालो, उसमें तो तनिक भी विलम्ब मत करो। समय के पाबंद व्यक्ति ही कुछ कर गुजरते हैं, सफलता की राह पर बढ़ते हैं।

 

चलो बुलावा आया है ...
मैसूरु. राजस्थान रावणा राजपूत समाज के तत्वावधान में चतुर्थ वार्षिक नवरात्रि उत्सव के उपलक्ष्य में चामुण्डेश्वरी माता के नाम भजन सत्संग हुआ। प्रारंभ में माता की तस्वीर पर पुष्पहार अर्पित कर ज्योत प्रज्वलित किया गया। पं रामरतन जोशी ने भोग चढ़ाया। सभा में कलाकार जेठूसिंह राठौड़ व मंडली ने भजनों की प्रस्तुति दकरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। हीराराम चौधरी ने नृत्य प्रस्तुति दी। समाज के अध्यक्ष बाबूसिंह चौहान, उपाध्यक्ष पारस सिंह परमार, सचिव अमरसिंह परमार, राजस्थान विष्णु सेवा ट्रस्ट के सचिव भंवरसिंह भाटी, नवयुवक मंडल अध्यक्ष पृथ्वीसिंह चांदावत आदि पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

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