सांस्कृतिक अकादमियों की हालत बेहद खराब

देश के प्रगतिशील राज्यों की सूची में शामिल होने के बावजूद कर्नाटक अपने सांस्कृतिक संगठनों की रक्षा में फिसड्डी साबित हुआ है

By: शंकर शर्मा

Published: 12 Nov 2017, 09:35 PM IST

बेंगलूरु. देश के प्रगतिशील राज्यों की सूची में शामिल होने के बावजूद कर्नाटक अपने सांस्कृतिक संगठनों की रक्षा में फिसड्डी साबित हुआ है। राज्य की सभी सांस्कृतिक अकादमियां खस्ता हालत में हैं। कर्नाटक राज्य ज्ञान आयोग की हाल में जारी हुई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।


आयोग के सदस्य सचिव विक्रम संपत के मुताबिक कला, चित्रकला लोक कला, साहित्य तथा संस्कृति क्षेत्र की दस अग्रणी सांस्कृतिक संस्थाओं के समग्र अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में राज्य के कर्नाटक साहित्य अकादमी, कर्नाटक ललित कला अकादमी, वेंकटप्पा आर्ट गैलरी जैसी संस्थाओं का अध्ययन कर बताया है कि यह अग्रणी संस्थाएं आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार इन संस्थाओं को कुशल मानव संसाधन, कर्मचारियों को प्रशिक्षण तथा बुनियादी सुविधाएं मुहैया करने में विफल रही है।


सोशल मीडिया पर मौजूदगी नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के 17 सरकारी संग्रहालयों को 37 लाख रुपए का अनुदान मिला है। राज्य का कन्नड़ तथा संस्कृति विभाग समेत राज्य की विभिन्न 8 अकादमियां अभी तक सोशल मीडिया में अपना अस्तित्व दिखाने में विफल रही है। जो लोक ऐसी संस्थाओं का संचालन कर रहें है ऐसे लोगों को पर्याप्त वेतन नहीं मिलने के कारण यह लोग इन संस्थानों के संचालन में रुचि नहीं दिखा रहे है।


रिपार्ट में बताया गया है कि इन अकादमियों में कार्यरत 15 कर्मचारियों को गत 25 वर्ष में सीमित वेतन के अलावा कोई प्रोत्साहन नहीं मिला है। इसके कारण राज्य की सभी अकादमी खस्ताहाल में पहुंची है। कर्नाटक पुस्तक प्राधिकरण वार्षिक पुस्तक मेले में 10 से 15 हजार लोगों को आकर्षित करता है लेकिन अन्य अकादमी 150 लोगों को भी आकर्षित करने में विफल रही इन सरकारी अकादमियों के चेयरमैन तथा रजिस्टारों के बीच समन्वय का अभाव होने के कारण इन संस्थाओं का प्रबंधन चरमरा रहा है।


सजा मान कर काम करते हैं कर्मचारी
रिपार्ट में कहा गया है कि केवल किसी के पुनर्वास के लिए किसी अकादमी का गठन नहीं किया जा सकता है। ऐसी सांस्कृतिक अकादमी में नियुक्त सरकारी कर्मचारी भी इस नियुक्ति को सजा मान कर चल रहे है। रिपोर्ट में अकादमियों के प्रशासनिक ढांचे में आमूलचूल सुधार लाने के लिए राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव देने के साथ ही इन्हें लागू करने का तरीका बताया गया है।

शंकर शर्मा
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