गठबंधन सरकार बचाने की आखिरी कोशिश जारी

-कैबिनेट पुनर्गठन पर हो रहा विचार
-कुछ मंत्रियों के इस्तीफे दिलाकर असंतुष्टों को शामिल करने का प्रस्ताव

By: Rajeev Mishra

Updated: 07 Jul 2019, 10:39 PM IST

बेंगलूरु. विधायकों के सामूहिक इस्तीफे से संकट में आई एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जनता दल -एस गठबंधन सरकार को बचाने की आखिरी कोशिश जारी है। रविवार को बेंगलूरु से लेकर नई दिल्ली और मुंबई तक हलचल रही है और शीर्ष नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी रहा। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने इस्तीफे पर विचार करने के लिए मंगलवार की समय-सीमा तय की है जिसको देखते हुए गठबंधन सरकार के लिए सोमवार का दिन काफी अहम होगा।
सूत्रों के मुताबिक सरकार बचाने के लिए कई फार्मूले पर विचार हुआ लेकिन जिस फार्मूले पर अमल किया जा रहा है वह है कैबिनेट पुनर्गठन। इस फार्मूले के तहत कुमारस्वामी कैबिनेट से विश्वस्त और पार्टी के प्रति वफादार मंत्रियों से इस्तीफे दिलाकर असंतुष्ट विधायकों को समायोजित करने का प्रस्ताव है। इस्तीफा देकर मुंबई में डेरा जमाए असंतुष्ट विधायकों को भी यह प्रस्ताव भेजा गया है और उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर निर्णय किया जा सकता है। हालांकि, कितने मंत्रियों का इस्तीफा दिलाया जाएगा अथवा कितने असंतुष्टों को मंत्री पद देकर सरकार बचाई जा सकती है यह तय नहीं हो पाया है। जिन 12 विधायकों ने इस्तीफा दिया है उनमें से तीन पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के पक्के समर्थक माने जाते हैं जबकि बेंगलूरु के एक वरिष्ठ विधायक रामलिंगा रेड्डी से गठबंधन सरकार को सबसे अधिक उम्मीदें हैं। अगर ये चार विधायक अपना इस्तीफा वापस लेते हैं तो सरकार को काफी राहत मिलेगी। कथित तौर पर रामलिंगा रेड्डी को उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर तक दिया जा रहा है। हालांकि, रामलिंगा रेड्डी ने रविवार को फिर दोहराया कि 'मैं अपने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने फैसले पर अडिग हूं। मैंने केसी वेणुगोपाल को सबकुछ बता दिया है।Ó
रामलिंगा रेड्डी हो सकते हैं अहम कड़ी
सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार के बचने या गिरने के बीच रामलिंगा एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। बेंगलूरु के बीटीएम लेआउट से 7 बार के विधायक सिद्धरामय्या सरकार में गृह एवं परिवहन मंत्री रहे। अगर वे अपना इस्तीफा वापस लेते हैं तो सिद्धरामय्या समर्थक एसटी सोमशेखर, बी.बसवराज और मुनिरत्ना भी उनका अनुकरण कर सकते हैं। दूसरी ओर, 8 विधायक जो रमेश जारकीहोली और जद-एस नेता एएच विश्वनाथ के संपर्क में हैं उन्हें मनाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। अमरीका से वापस लौटे मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी भी असंतुष्ट विधायकों के साथ संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। कुमारस्वामी ने भी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस से तुरंत कैबिनेट पुनर्गठन के विकल्प को अपनाने और असंतुष्टों को समयोजित करने की बात कही है।
देवगौड़ा ने रखा खरगे को सीएम बनाने का प्रस्ताव
उधर, सरकार बचाने के लिए अन्य फार्मूले के तहत जद-एस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा ने मुख्यमंत्री बदलने और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा। देवगौड़ा ने कहा कि अगर बगावत करने वाले विधायक खरगे को सीएम बनाए जाने पर अपना इस्तीफा वापस ले लेते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। खरगे के सीएम बनने पर भाजपा भी एक दलित को पद से हटाने की कोशिश नहीं करेगी। हालांकि, कांग्रेस कैम्प में इस प्रस्ताव को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। कुछ असंतुष्ट नेता सिद्धरामय्या को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठाए हैं लेकिन संभवत: यह फार्मूला कामयाब नहीं होगा क्योकि जद-एस सिद्धरामय्या को सीएम बनाने का प्रस्ताव नहीं मानेगी।
रविवार को बेंगलूरु में सिद्धरामय्या का आवास 'कावेरीÓ और उसके करीब स्थित ही एक पांच सितारा होटल राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और महासचिव केसी वेणुगोपाल, सिद्धरामय्या, मल्लिकार्जुन खरगे, उप मुख्यमंत्री डॉ.जी.परमेश्वर और डीके शिवकुमार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी था। नई दिल्ली से कांग्रेस आलाकमान की भी प्रदेश की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। वहीं, इस्तीफा देने वाले विधायकों के मुंबई में ठहरने से वहां भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।

Rajeev Mishra Reporting
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