कांग्रेस प्रत्याशी जीती तो क्षेत्र को पहली बार मिलेगा महिला प्रतिनिधि

कांग्रेस प्रत्याशी जीती तो क्षेत्र को पहली बार मिलेगा महिला प्रतिनिधि

Shankar Sharma | Publish: Apr, 28 2019 11:23:29 PM (IST) | Updated: Apr, 28 2019 11:23:30 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

बागलकोट-लोकसभा सीट के 23 मई को आने वाले चुनाव परिणाम इस बार यह तय करेंगे कि क्या इस सीट पर पिछले तीन बार की तरह कब्जा करने में भाजपा सफल रहेगी या कांग्रेस उसके कब्जे से यह सीट छीन लेगी। अगर कांग्रेस प्रत्याशी जीती तो क्षेत्र को पहली बार महिला प्रतिनिधि मिलेगा।

इलकल (बागलकोट). बागलकोट-लोकसभा सीट के 23 मई को आने वाले चुनाव परिणाम इस बार यह तय करेंगे कि क्या इस सीट पर पिछले तीन बार की तरह कब्जा करने में भाजपा सफल रहेगी या कांग्रेस उसके कब्जे से यह सीट छीन लेगी। अगर कांग्रेस प्रत्याशी जीती तो क्षेत्र को पहली बार महिला प्रतिनिधि मिलेगा।

गत 23 अप्रेल को इस सीट पर मतदान हुआ। चुनावी अखाड़े में कुल 14 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया। मतदाताओं ने अपने पसंद के उम्मीदवार का भाग्य ईवीएम में बंद कर दिया। अब मतदाता अपने-अपने तरीके से हार-जीत का कयास लगा रहे हैं। जहां भी चार लोग किसी उत्सव, समारोह, शादी या होटल आदि में एक साथ जुटते हैं, वहीं पर चुनाव की ही चर्चा शुरू हो जाती है।


बागलकोट लोकसभा क्षेत्र में सन् 1952 से 1991 तक चुनाव में हमेशा कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ही जीतते रहे। प्रथम चुनाव 1952 में कांग्रेस उम्मीदवार रामप्पा बीदरी चुने गए थे। उसके बाद 1957 में भी रामप्पा बीदरी पुन: निर्वाचित हुए। इसी प्रकार 196 2 में कांग्रेस के उम्मीदवार संगनगौड पाटिल चुने गए। दूसरी बार 196 7 में फिर से संगनगौड पाटिल ही चुने गए। कांग्रेस के बी.ई. चौधरी 1971 में निर्वाचित हुए। दूसरी बार पुन: 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के. बी. चौधरी ने जीत का सिलसिला ज़ारी रखा। इसके बाद 1980 में हुए चुनाव में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र पाटिल ने अपना भाग्य आज़माया और वे भी सफल रहे।


इसी तरह 198 4 में कांग्रेस के उम्मीदवार एच.बी पाटिल सांसद बने। कांग्रेस के ही उम्मीदवार सुभाष पाटिल ने भी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए 198 9 में जीत दर्ज की और सांसद बने। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े को हराकर 1991 कांग्रेस के युवा उम्मीदवार सिद्धू नामेगौड ने जीत दर्ज कर इतिहास रचा। इसके बाद 1996 में पहली बार मतदाताओं का कांग्रेस के प्रति मोहभंग हुआ जिस कारण बागलकोट क्षेत्र से जनतादल के एच.वाई. मेट्टी ने अपना परचम लहराते हुए जीत दर्ज की। लोकशक्ति के उम्मीदवार अजय कुमार शरनायक ने 1998 में यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत का परचम लहराया। एक बार फिर 1999 में कांग्रेस पार्टी ने मतदाताओं का दिल जीता और कांग्रेस उम्मीदवार आर.एस. पाटील ने जीत दर्ज की।


इसके बाद 2004 में हुए 14वें लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पी. सी. गद्दीगौडर ने जीत हासिल कर बागलकोट क्षेत्र में भाजपा का खाता खोलने मे सफलता पाई। आगे भी गद्दीगौडर ने जीत का सिलसिला जारी रखते हुए 2009 एवं 2014 में भाजपा के खाते में यह सीट डाल दी। पी. सी. गद्दीगौडर यहां से तीन बार सांसद बनने वाले एकमात्र उम्मीदवार हैं। अब चौथी बार पी. सी. गद्दीगौडर मैदान में उतरे हैं। वैसे तो बागलकोट क्षेत्र में कुल 14 उम्मीदवार अपना भाग्य आज़मा रहे हैं, लेकिन असली मुकाबला तो भाजपा-कांग्रेस के बीच ही है।


वीणा काशप्पनवर राज्य में एकमात्र कांग्रेस की महिला उम्मीदवार हैं। वीणा काशप्पनवर बागलकोट जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने अपने प्रचार में महिलाओं का मन जीतने की पूरी कोशिश की है। चुनाव प्रचार में खुद को जिले की बेटी बताते हुए मतदाताओं का दिल जीतने का भरसक प्रयास किया। इस बार मुकाबला कांटे का है। अब देखना यह है कि मतदाताओं ने अपना वोट किस किसको दिया।

यह भी दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा उम्मीदवार पी. सी. गद्दीगौडर चौथी बार चुनाव जीतकर एक नया इतिहास रचने में कामयाब होंगे या नहीं। अगर वीणा काशप्पनवर चुनाव जीतती हैं तो यह भी एक नया इतिहास बनेगा क्योंकि इतिहास में पहली बार कोई महिला इस क्षेत्र से सांसद बनेगी। इसके लिए २३ मई तक का इंतजार करना होगा।

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