कांग्रेस ने चुनावी जंग से पहले डाले हथियार

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इन उपचुनावों में भाजपा सभी 15 सीटें जीतेगी तथा पहले से कहीं और मजबूत और स्थिर होगी क्योंकि प्रदेश के लोग भी यही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष का बजट फरवरी-2020 माह में पेश किया जाएगा और उनका यह बजट किसानोन्मुख होगा।


बेंगलूरु. मुख्यंत्री बीएस येडियूरप्पा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में राज्यसभा की एक सीट के उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार को खड़ा नहीं करके कांग्रेस व जद-एस ने उपचुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है।


मुख्यमंत्री ने मंगलवार को हुब्बली हवाईअड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कांग्रेस व जद-एस दोनों ही राज्य से राज्यसभा की एकमात्र सीट के उपचुनाव में अपने उम्मीदवार खड़े करने में विफल रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि उन्होंने विधानसभा के उपचुनावों में पहले ही अपनी हार मान ली है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को बहुमत हासिल होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इन उपचुनावों में भाजपा सभी 15 सीटें जीतेगी तथा पहले से कहीं और मजबूत और स्थिर होगी क्योंकि प्रदेश के लोग भी यही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष का बजट फरवरी-2020 माह में पेश किया जाएगा और उनका यह बजट किसानोन्मुख होगा।

उन्होंने कहा कि 9 दिसम्बर को चुनाव परिणाम आ जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उपचुनावों के परिणाम आने के बाद देखिए और प्रतीक्षा कीजिए कि कौन इस्तीफा देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस व जद-एस संगठित थे पर चुनावी रण में इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया और चुनावों में हुई करारी हार के बाद दोनों ही दल एक दूसरे को दोषी ठहराने लगे। उन्होंने सरकार के बारे में जद-एस के बयानों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।


जद-एस कांग्रेस में गठजोड़ पर एक राय नहीं: अशोक
उधर, राजस्व मंत्री आर.अशोक ने कहा कि 9 दिसम्बर को चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक बदलाव की बातें कर रहे जनतादल-एस व कांग्रेस में एक राय नहीं है और दोनों ही दलों के नेताओं ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही हथियार डाल दिए हैं।


अशोक ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे चुनाव परिणाम आने के बाद खुशखबरी देने की बातें कह रहे हैं जबकि राज्यसभा उपचुनाव में विपक्ष साझा उम्मीदवार खड़ा करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता एक तरह से याचक की तरह बर्ताव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता आजा- आजा कहकर बुला रहे हैं वहीं जद-एस के प्रमुख एच.डी. देवेगौड़ा कभी नहीं- कभी नहीं कहकर कांग्रेस का प्रस्ताव ठुकरा रहे हैं।


कांग्रेस में एकता का अभाव
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयान में ही एक राय नहीं है। मल्लिकार्जुन खरगे एक तरह का बयान देते हैं तो सिद्धरामय्या इसके ठीक विपरीत बयान देते हैं। इसके अलावा जी. परमेश्वर व डी.के.शिवकुमार भी अलग अलग बयान दे रहे हैं। इन नेताओं के अलग अलग बयान देने से साबित हो जाता है कि कांग्रेस में एकता का नितांत अभाव है।


उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या कांग्रेस के सभी सीटों पर जीतने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसा है तो उन्होंने राज्यसभा के उपचुनाव में उम्मीदवार क्यों नहीं खड़ा किया। कांग्रेस में अकेले पड़ चुके सिद्धरामय्या अब विपक्ष के नेता के पद को बचाने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं और उनकी कही बातों को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है।

Surendra Rajpurohit
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