बैलगाड़ी में सवार होकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेता

पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का अनूठे अंदाज में विरोध
विधानसभा गेट के पास पुलिस के साथ हुई नोंक-झोंक
सिद्धरामय्या ने दी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की चेतावनी

By: Rajeev Mishra

Published: 13 Sep 2021, 10:53 PM IST

बेंगलूरु.
विधानमंडल के 10 दिवसीय मानसून सत्र के पहले दिन पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या व अन्य विधायक बैलगाड़ी में सवार होकर विधानसभा पहुंचे।

डीके शिवकुमार सदाशिवनगर स्थित अपने आवास से जबकि सिद्धरामय्या कुमार पार्क स्थित अपने आवास से अलग-अलग बैलगाडिय़ों में सवार होकर निकले। हालांकि, विधानसभा परिसर में केवल दो बैलगाडिय़ों को आने की अनुमति दी गई। पहली बैलगाड़ी में सिद्धरामय्या, डीके शिवकुमार, रामलिंगा रेड्डी, एमबी पाटिल, प्रकाश राठौड़ समेत अन्य नेता आए जबकि काफी देर बाद दूसरी बैलगाड़ी के प्रवेश की अनुमति मिली जिसमें प्रियांक खरगे, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खंड्रे तथा अन्य नेता आए। इससे पहले विधानसभा परिसर में बैलगाड़ी के प्रवेश को लेकर कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। पुलिस प्रशासन उन्हें विधानसभा में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहा था जिसपर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने नाराजगी व्यक्त हुए कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो उन्हें बैलगाड़ी पर सवार होकर विधानसभा में प्रवेश करने से रोके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की चेतावनी भी दी।

आम जनता का जेब काट रही सरकार: डीके
बैलगाड़ी पर सवार डीके शिवकुमार ने पत्रकारों से बात करते कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से जनता बुरी तरह प्रभावित हुई है। भाजपा सरकार लोगों के जेब काट रही है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान जहां सरकार को जनता की समस्याओं का हल करना चाहिए वहीं आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ाकर जख्मों पर नमक छिड़क रही है। सरकार के पास को आंख-कान नहीं है, वह जनता के प्रति असंवेदनशील हो चुकी है। कांगे्रस इसका सदन के अंदर और बाहर विरोध करेगी।

यूपीए सरकार को दोषी ठहराना सरासर गलत: सिद्धरामय्या
संवाददाताओं से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या ने कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है। सरकार का कहना है कि यूपीए कार्यकाल के 1.30 लाख करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड के भुगतान के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं। यह सरकार झूठ कह रही है। सच्चाई यह है कि सरकार ने कर और उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 25 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त उगाही की है। क्या पिछले 7 साल में सरकार ने उसका भुगतान नहीं किया। ये रुपए कहां गए।

झूठ बोल रही सरकार
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 69.72 डॉलर प्रति बैरल है जबकि पेट्रोल की कीमत 106 रुपए प्रति लीटर। यूपीए सरकार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल थी जबकि पेट्रोल के भाव 69.72 रुपए लीटर थे। इसलिए ईंधन की कीमतों पर सरकार साफ झूूठ बोल रही है।

मास्टर स्ट्रोक नहीं, हकीकत: पाटिल
पूर्व गृह मंत्री एमबी पाटिल ने 'पत्रिकाÓ से बात करते हुए कहा कि यह कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक नहीं बल्कि आज की हकीकत है। इससे आम आदमी, किसान और महिलाएं भी परेशान हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा और यहां तक नेपाल में भी पेट्रोल के भाव भारत की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर तथा अन्य राज्यों में भी इस तरह अपना विरोध जताएगी। उन्हें उम्मीद है कि इसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव होगा।

उचित जवाब देंगे: मुख्यमंत्री
उधर, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस नेताओं के बैलगाड़ी में सवार होकर विधानसभा पहुंचने पर कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में पेट्रोल की कीमतों में 100 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई थी। उचित होता अगर उस समय भी कांग्रेस नेता इस तरह का विरोध प्रदर्शन किए होते। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा में यह मुद्दा उठाया जाएगा तो वे इसका उचित जवाब देंगे।

पदयात्रा, सायकिल का विकल्प बेहतर होता: सुधाकर
वहीं, स्वास्थ्य मंंत्री डॉ के.सुधाकर ने कहा कि विरोध के लिए कांग्रेस नेता सायकिल या पदयात्रा का विकल्प भी चुन सकते थे। बैलगाड़ी से आने के कारण यातायात बाधित हुआ और वे देर से विधानसभा पहुंचे।

Rajeev Mishra Reporting
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